नौवीं तक पढ़ीं, शादी के बाद सीखा आटा गूंथना… आज 60 हजार रुपये किलो की चटनी बनाने वाली शेफ बनीं पार्वती सोनी
बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर की पार्वती सोनी की कहानी संघर्ष, सीख और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल है, जिसने यह साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छूट गई, शादी के समय उन्हें आटा गूंथना तक नहीं आता था, लेकिन आज वे शाही रसोई में बतौर प्रोफेशनल शेफ अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी बनाई विशेष चटनी की लागत 60 से 70 हजार रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है और वे मास्टरशेफ इंडिया सीजन-9 में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।5 जुलाई 1998 को बीकानेर के रांगड़ी चौक में विवाह के बाद पार्वती अपने ससुराल पहुंचीं। मायके में सबसे छोटी होने के कारण उन्हें रसोई का अनुभव नहीं था। ससुराल आने पर जब पहली बार आटा गूंथने की बारी आई तो वे असहज हो गईं। उनके पति एवं ज्वेलर ललित सोनी ने उन्हें ताना देने के बजाय स्वयं खाना बनाना सिखाया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।बीकानेर की पारंपरिक “गोठ” संस्कृति में पार्वती हर बार नई डिश बनाकर भेजने लगीं। उनके व्यंजनों की लगातार तारीफ होने लगी। इसी प्रोत्साहन ने उन्हें वर्ष 2012 में पहली कुकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया, जहां उन्होंने जीत हासिल की।इस बीच पति की प्रेरणा से पार्वती ने अपनी अधूरी पढ़ाई भी दोबारा शुरू की। उन्होंने अपने बेटे के साथ एक ही परीक्षा कक्ष में बैठकर दसवीं और बाद में बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह उनके जीवन का सबसे प्रेरणादायक अध्याय बन गया।आज पार्वती जयपुर के सिटी पैलेस स्थित शाही रेस्तरां में शेफ-डी-पार्टी (Chef de Partie) के पद पर कार्यरत हैं। लगभग 80 सदस्यीय किचन टीम में वे अकेली महिला शेफ हैं और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों को देश-विदेश के मेहमानों तक पहुंचा रही हैं।उनकी सबसे चर्चित रेसिपी सोना-चांदी की भस्म, सूखे मेवों और अन्य विशेष सामग्री से तैयार होने वाली चटनी है। पार्वती के अनुसार इसकी लागत 60 से 70 हजार रुपये प्रति किलो तक होती है। हालांकि, इसके ऐतिहासिक उपयोग और शाही परंपरा से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि धातु भस्म युक्त खाद्य या औषधीय पदार्थों का सेवन केवल योग्य आयुर्वेदाचार्य की सलाह से ही किया जाना चाहिए।जनवरी 2026 में पार्वती अपने बेटे हिमांग के साथ मास्टरशेफ इंडिया सीजन-9 में पहुंचीं। मां-बेटे की इस जोड़ी ने बीकानेर के पारंपरिक व्यंजन गेहूं का खीचड़ा और इमलानी सहित अपनी विशेष चांदी की चटनी से जजों और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। हालांकि वे प्रतियोगिता का खिताब नहीं जीत सकीं, लेकिन उनकी प्रतिभा और संघर्ष ने लाखों लोगों को प्रेरित किया।पार्वती सोनी की कहानी बताती है कि सफलता केवल जीतने वालों की नहीं होती, बल्कि उन लोगों की भी होती है जो हर चुनौती के बाद फिर से खड़े होकर अपने सपनों को जीना जानते हैं। शादी के बाद रसोई से शुरुआत करने वाली पार्वती आज प्रोफेशनल शेफ के रूप में महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।




















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