रायपुर। गणेश विसर्जन एवं अनंत चतुर्दशी के अवसर पर निकली झांकियों में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में उत्साह के बीच तेज आवाज में बजने वाले DJ और साउंड सिस्टम को लेकर आम लोगों की परेशानी भी सामने आई।झांकी के दौरान कई स्थानों पर साउंड सिस्टम की आवाज इतनी तेज रही कि आसपास मौजूद बुजुर्गों, बच्चों और आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों के घबराकर मौके से चले जाने की स्थिति भी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक, सामाजिक या किसी अन्य सार्वजनिक आयोजन में निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।लोगों का सवाल है कि जब ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियम और निर्धारित मानक मौजूद हैं, तो आयोजनों के दौरान उनकी प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो पाती। लोगों का कहना है कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए और आयोजन किसी भी धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक या अन्य संगठन से जुड़ा हो, ध्वनि सीमा के उल्लंघन पर कार्रवाई समान रूप से होनी चाहिए।न्यायालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांगजनहित से जुड़े लोगों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर न्यायालय और संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं को स्पष्ट एवं प्रभावी दिशा-निर्देशों पर जोर देना चाहिए। आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले DJ और साउंड सिस्टम के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य किया जाए तथा उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार तत्काल कार्रवाई हो।साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई केवल चेतावनी तक सीमित न रहे, बल्कि कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार जुर्माना, उपकरण जब्ती और अन्य दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।नियम सभी के लिए समान होंआम नागरिकों का कहना है कि कानून का पालन कराने में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। आयोजन किसी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्था या किसी अन्य समूह का हो—यदि निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन होता है तो कार्रवाई नियमों के अनुसार समान रूप से की जानी चाहिए।धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखते हुए आस्था भी रहे और आम नागरिकों के स्वास्थ्य एवं शांति का भी ध्यान रखा जाए, यही इस पूरे मुद्दे का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।















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