एक पहाड़ी पर सुबह 8 बजे का वक्त। एक बूढ़े की लाश पड़ी है। वह पूरी तरह काली पड़ चुकी है। लाश के बगल में 24-25 साल का लड़का घुटने के बल बैठा है। फूट-फूटकर रो रहा है।
तभी कुछ महिलाएं आईं और लाश के पास बैठ गईं। एक खास तरह के पेड़ के पत्तों से लाश का चेहरा साफ करने लगीं। उनमें से एक महिला ने दूर खड़े बुजुर्ग को कुछ इशारा किया।
बुजुर्ग ने उस लड़के की तरफ एक धारदार छोटी तलवार बढ़ाई। लड़के ने कांपते हाथों से तलवार थामी और धीरे-धीरे लाश का गला रेतने लगा। कुछ ही देर में लाश का सिर धड़ से अलग हो गया। ये लाश लड़के के पिता की है, जो डेढ़ महीने से इस पहाड़ी पर पड़ी थी। दरअसल, ये बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रहा है।













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