छत्तीसगढ़ के बस्तर दंतेवाड़ा जिले की बैलाडीला की पहाड़ियों में विराजमान ढोलकल गणेश के दर्शन अब भक्तों के लिए आसान होने जा रहे हैं। यहां की तीखी और सीधी चढ़ाई हर किसी के लिए आसान नहीं होती। ऐसे में यहां चट्टानों को तराशकर 3 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थापित प्रतिमा तक ज्यादा सुगम रास्ता बनाया जा रहा है। पाथ-वे के साथ हट (झोपड़ियां) और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएगी। जगह-जगह बैठने के इंतजाम भी किए जाएंगे।
फिलहाल वन विभाग ने पहाड़ियों के नीचे ढोलकल गणेश तक जानेवाले रास्ते में भव्य प्रवेश गेट तैयार कर लिया है। यहां बैठने, समय बिताने और पीने के पानी का इंतजाम कर लिया गया है। आगे ठहरने के लिए कैंपिंग सुविधा देने की भी तैयारी है। इसके अलावा पहाड़ी के ऊपर ढोलकल गणेश तक जाने के लिए सुगम रास्ता तैयार करने चट्टानों को तराशने का काम भी जारी है। स्थानीय समिति की ओर से गाइड की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित और बेहतर अनुभव मिल सके। वन विभाग दंतेवाड़ा जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह पहल कर रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल सकें।
10वीं-11वीं सदी की प्रतिमा 3 फीट ऊंची
बैलाडिला पहाड़ी पर करीब 3000 फीट ऊंचाई पर स्थित यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। यहां विराजमान भगवान गणेश की 3 फीट ऊंची पत्थर की प्रतिमा 10वीं-11 वीं शताब्दी के नागा वंश काल की मानी जाती है, जो इस क्षेत्र का मुख्य आकर्षण है।
यहां ट्रैकिंगः सुबह 7:30 से दोपहर 2 बजे तक। वापसीः शाम 5 बजे तक वापसी जरूरी है। प्रतिबंधः ट्रैकिंग के दौरान संगीत नहीं बजाएं। अनिवार्यः ट्रैकिंग के लिए गाइड साथ ले जाएं। सख्तीः पॉलीथिन, प्लास्टिक लेकर न जाएं।
ढोलकल को पर्यटन के रूप में विकसित करने का मुख्य उद्देश्य यहां अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत की जा सके।
















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