छत्तीसगढ़ की राजधानी के पास सिमगा में स्थित श्रीदत्तात्रेयसिद्धशक्तिपीठसिमगा पूरे भारत में एकमात्र ऐसा स्थान है जहां आदिशंकराचार्य के जन्मस्थान कालाडी केरल की मिट्टी भगवान #दत्तात्रेय के विग्रह के नीचे स्थापित की गई है।
इस शक्तिपीठ के निर्माण के दौरान सदगुरु श्री अण्णा महाराज इंदौर का अचानक आदेश हुआ कि निर्माणाधीन शक्तिपीठ की मिट्टी लेकर भारत के विभिन्न तीर्थस्थल जाओ और उन तीर्थों की मिट्टी निर्माणाधीन शक्तिपीठ की मिट्टी को मिलकर एक पार्थिव शिवलिंग बनाना है।
उन सभी तीर्थों में इस संकल्प के साथ कि उन तीर्थों के देवता यहां सिमगा के शक्तिपीठ में स्थापित हो और अपने भक्तों का कल्याण करे , अनुष्ठान कर सिद्ध करवा कर लाए जो शक्तिपीठ में भगवान दत्तात्रेय के विग्रह के नीचे स्थापित होगी।
इस क्रम में केरल के कालाड़ी जहां आदि गुरु शंकराचार्य जी का जन्म हुआ था से भी वहां की मिट्टी सिद्ध करवा कर सिमगा छत्तीसगढ़ लाई गई और शक्तिपीठ में भगवान दत्तात्रेय के विग्रह के नीचे स्थापित की गई है।
ऐसा यह भारत का इकलौता तीर्थ है, जहां इस प्रकार अनुष्ठान कर सिद्ध करवा कर लाई गई बहुत से तीर्थों की मिट्टी स्थापित है।
जो शक्तिपीठ में अपने भक्तों को उस विशेष तीर्थ में पूजा करने का फल प्रदान करती है।
इस शक्तिपीठ के निर्माण के पीछे श्री गुरु की मूल संकल्पना ही यही रही है।
**Ranjeet bhonsle
Mass Media expart Raipur CG
छत्तीसगढ़ के सिमगा में स्थित श्रीदत्तात्रेय सिद्धशक्ति पीठ सिमगा पूरे भारत में एकमात्र ऐसा स्थान है जहां आदिशंकराचार्य के जन्मस्थान कालाडी केरल की मिट्टी भगवान दत्तात्रेय के विग्रह के नीचे स्थापित की गई है।













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