राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में मोटरास का सिखवाल परिवार lभीलवाड़ा जिले में भारतवर्ष के सिखवाल समाज के सर्वाधिक परिवार निवास करते हैं l जिला मुख्यालय भीलवाड़ा पर मोटरास सिखवाल समाज के 25 परिवार निवास करते हैं l चार पीढ़ी पूर्व इन सभी बंधुऔ के एक ही पिताश्री हुआ करते थे, इस मोटरास सिखवाल परिवार में आज भी एकता और भाईचारे व प्रेम की मिसाल दिखती है, जो समाज के लिए एक उदाहरण बना हुआ उनका कहना है कि परिवार से बढ़कर कोई नहीं होता, पड़ोसी और दोस्त यार तो कुछ समय के लिए होते हैं सुख-दुखम हमेशा तो अपने होते हैं, ओर अपनों से ही समाज की एकता और समाज का विकास होता है,हम सब साथ मिकर चलेंगे तभी आगे बढ़ेंगे और इतिहास रचेंगे, हमारे परिवार में एक व्यास जी जो नारायण खेड़ा से स्थानांतरित हुए,आज सभी एक मधुर स्मृतियों के रूप में एक वैचारिक बैठक के दौरान उपस्थित हुए । इसमें समाज बंधु पीछे वाली लाइन में -जज साहब ब्रह्मानंद , राजस्थान उद्योग सेवा के पूर्व अधिकारी शिवराज शर्मा , सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल महावीर शर्मा, पूर्व प्रधानाध्यापक सोहनलाल शर्मा, समाजसेवी कैलाश शर्मा ,पूर्व सांख्यिकी अधिकारी भेरूलाल शर्मा, नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल अरुण पुरोहित, नर्सिंग ऑफिसर नवरतन पुरोहित, सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल अमित पुरोहित ,पूर्व प्रधानाध्यापक गोपाल व्यास, डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर दशरथ शर्मा ,अधिशासी अधिकारी नगर पालिका अभिषेक शर्मा ,एडवोकेट अंशुल शर्मा, उद्योगपति रामस्वरूप शर्मा ,जिला पशुपालन अधिकारी डॉक्टर गोपालजी शर्मा ,वरिष्ठ शिक्षक सांवरलाल शर्मा , तथा गांव की दो पुत्रवधू भीलवाड़ा शहर में कॉलेज प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं l व्यापार में संलग्न लक्ष्मण नंद राम पुरोहित तथा भगवान पुरोहित तथा स्वर्गीय रतनलाल पुरोहित एवं स्वर्गीय घीसू लाल व्यास एवं प्रधानाध्यापक रामगोपाल पुरोहित तथा सीताराम पुरोहित का परिवार भी निवासरत है lशहर में लगभग गांव की 15 बहन बेटियां भी निवासरत है तथा अपने परिवार के साथ गांव तथा समाज का नाम रोशन कर रही है lआप सभी का अपने गांव मोटरास के साथ-साथ भीलवाड़ा में भी निवास स्थान है l आज भी गांव में सभी की जडे मजबूत है lसभी बंधु प्रत्येक तीन माह में एक साथ उपस्थित होते हैं lइस गांव से समाज की प्रतिभाएं भीलवाड़ा शहर के अलावा – नई दिल्ली ,ब्यावर, लखनऊ, अबू धाबी( ओमान), जर्मनी गणराज्य , राजसमंद ,रतलाम , भीम, जयपुर शहित अनेक स्थानों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और समाज का नाम रोशन कर रहे हैंlइस गांव की एक और विशेषता है कि यहां पर सामूहिक विवाह अपने स्तर पर ही होते हैं किसी से कोई चंदा नहीं लेते हैं. संबंधित बच्चों के परिवार आपस में खर्चा बांट लेते हैं l एक बार गांव की ही 22 बच्चियों का विवाह एक साथ संपन्न हुआ जिसमें सामूहिक भोज एक ही रखा गया और संबंधित परिवार के घर पर ही सप्तपदी हुई अनावश्यक खर्च नहीं हुआ l यह संयुक्त परिवार प्रथा का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण कहा जा सकता है lफिजूल खर्ची रोकने का यह अनूठा मॉडल समाज अपने-अपने स्थानीय स्तर पर लागू कर सकते हैं l समाज का आशीर्वाद इस परिवार पर बना रहे l
शिवराज शर्मा, मोटरास















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