पहली बार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की नई कलेक्टर बनकर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू जब अपने ननिहाल मामा गांव पहुंची, तो उनकी नानी का प्यार और मामी द्वारा स्वागत कर पूजा पाठ किया फिर मामी ने अपनी भांजी के पैर धोक (पैर पड़े) छत्तीसगढ़ में भांजी भांजे का कितना महत्व है ,मामा घर की देखिए कुछ तस्वीरें …….

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए गए तबादलों के बाद जब पहली बार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की नई कलेक्टर बनकर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू जब अपने ननिहाल मामा गांव पहुंची, तो उनके नानी का प्यार और मामी द्वारा स्वागत कर पूजा पाठ किया फिर मामी ने अपनी भांजी के पैर धोक (पैर पड़े) छत्तीसगढ़ में भांजी भांजे का बहुत महत्व है मामा घर में देखिए कुछ तस्वीरें ………वाकई एक बहुत ही भावुक और गर्व भरा क्षण है। मामाघर और नानी का प्यार हर किसी के जीवन में सबसे अनमोल स्मृतियों में से एक होता है। जब कोई बिटिया ‘कलेक्टर’ जैसे गरिमामय पद पर पहुँचकर अपनी जड़ों की ओर लौटती है, तो वह दृश्य केवल एक स्वागत नहीं, बल्कि पूरे परिवार के संस्कारों और संघर्षों की जीत का उत्सव बन जाता है।एक भांजी के लिए नानी का आशीर्वाद दुनिया की सबसे बड़ी ताकत होती है और मामा मामी का लाड उस रिश्ते में मिठास भर देता है। इस तरह के आत्मीय स्वागत की तस्वीरें अक्सर समाज में यह संदेश देती हैं कि आप चाहे कितने भी ऊँचे पद पर पहुँच जाएँ, अपनों का स्नेह और आशीर्वाद ही आपकी असली पूँजी है।मामाघर की यादें हमेशा खास होती हैं क्योंकि:वहाँ पद का प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि रिश्तों की सादगी होती है।नानी के हाथों का निवाला और मामी का वह अपनापन इंसान को वापस बचपन की मासूमियत में ले जाता है।यह पल बताते हैं कि सफलता की असली चमक अपनों की मुस्कुराहट में ही है।

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