राजस्थान के पुष्कर में इन दिनों एक रूसी विदेशी महिला की कठिन तपस्या लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। भीषण गर्मी और करीब 43 डिग्री तापमान के बीच महिला 9 धूनी अग्नि तपस्या कर रही है।यह साधना लगातार 21 दिनों तक चलेगी ,महिला चारों ओर जलती धूनियों के बीच बैठकर तप कर रही है, वहां आग ले लपेटो के लगभग 48 डिग्री तापमान में तप कर रही है , जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इतनी भीषण गर्मी में इस तरह की अग्नि तपस्या बेहद कठिन मानी जाती है। साधना स्थल पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ भी जुट रही है।
यह प्रसंग इन दिनों Pushkar में आस्था, योग-साधना और सनातन परंपराओं को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। रूस से आईं योगिनी अन्नपूर्णा नाथ द्वारा भीषण गर्मी में की जा रही “अग्नि तपस्या” ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
नाथ संप्रदाय की साधनाओं में धूणी, भस्म, मौन, तप और शरीर-मन पर नियंत्रण का विशेष महत्व माना जाता है। इस प्रकार की तपस्या का उद्देश्य केवल शारीरिक सहनशक्ति दिखाना नहीं, बल्कि मन को एकाग्र करना, इंद्रियों पर नियंत्रण और आध्यात्मिक साधना को गहरा करना माना जाता है।
जलती धूनियों के बीच बैठना, मौन साधना, भस्म धारण करना और गुरु-शिष्य परंपरा का पालन — नाथ परंपरा की प्राचीन साधना पद्धतियों से जुड़ा हुआ माना जाता है। विशेष रूप से “धूणी साधना” का उल्लेख कई योग परंपराओं में मिलता है।
नाथ संप्रदाय में दीक्षा के बाद स्त्री और पुरुष दोनों को समान रूप से “नाथ” संबोधन दिया जाना भी इसकी एक विशिष्ट परंपरा मानी जाती है। इसमें गुरु परंपरा और तपस्या को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।
हालांकि, ऐसी कठिन साधनाएं सामान्य लोगों के लिए नहीं मानी जातीं। अत्यधिक गर्मी, आग और लंबे समय तक उपवास या मौन जैसी प्रक्रियाएं स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए इन्हें प्रशिक्षित गुरु के मार्गदर्शन और विशेष आध्यात्मिक अनुशासन के अंतर्गत ही किया जाता है।
















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