NEET री-एग्जाम के दौरान भीमगंज थाना क्षेत्र के आसपास बने परीक्षा केंद्रों पर हजारों विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में अभिभावक भी पहुंचे। परीक्षा की लंबी प्रक्रिया, रिपोर्टिंग और सुरक्षा जांच के कारण अभिभावकों को कई घंटों तक केंद्रों के बाहर इंतजार करना पड़ा। ऐसे समय में मानवता और सामाजिक संवेदनशीलता की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली।क्षेत्र के निवासी गिरिराज खंडेलवाल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शिखा खंडेलवाल ने अपने घर के दरवाजे अभिभावकों के लिए खोल दिए। उन्होंने बाहर इंतजार कर रहे लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था की, बारिश से बचाव हेतु आश्रय उपलब्ध कराया तथा अपने घर के वॉशरूम का उपयोग भी सभी के लिए खुला रखा।महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज़ से आए अभिभावकों को इससे बड़ी राहत मिली। इस नेक पहल की खास बात यह रही कि धीरे-धीरे पूरा मोहल्ला इस सेवा कार्य में सहभागी बन गया। किसी ने चाय की व्यवस्था की, किसी ने कचौरी मंगवाई तो किसी ने लस्सी और अन्य जलपान की व्यवस्था की। सभी ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि परीक्षा केंद्रों के बाहर इंतजार कर रहे अभिभावकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।मानवता और विश्वास की इस मिसाल का एक और भावनात्मक पहलू तब सामने आया जब परीक्षा के नियमों के कारण कुछ विद्यार्थियों को अपने आभूषण बाहर उतारने पड़े। एक छात्रा ने अपने कुंडल गिरिराज खंडेलवाल के पास सुरक्षित रखे और निश्चिंत होकर परीक्षा देने चली गई। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और सद्भाव का प्रतीक भी है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वहां का माहौल देखकर महसूस हुआ कि कोटा की पहचान केवल कोचिंग संस्थानों, प्रतियोगी परीक्षाओं और परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे संवेदनशील और सेवाभावी लोगों से भी है जो जरूरत के समय अजनबियों को अपना बना लेते हैं।इस सेवा कार्य ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जीवित है। बिना किसी प्रचार, स्वार्थ या अपेक्षा के जरूरतमंदों की मदद करना समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।गिरिराज खंडेलवाल, शिखा खंडेलवाल एवं सेवा कार्य में सहयोग करने वाले पूरे मोहल्ले को जनभारत संवाद की ओर से नमन। मानवता की ऐसी मिसालें समाज में भरोसा, अपनापन और संवेदनशीलता को मजबूत करती हैं।
🙏— जनभारत संवाद, कोटा
















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