शास्त्रीय संगीत के संरक्षण के लिए सरकार बनाए ठोस नीति, युवाओं को मिले रोजगार: पं. अवध सिंह ठाकुर प्रसिद्ध तबला वादक।

रायपुर, 16 जुलाई। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात तबला वादक एवं प्रसार भारती आकाशवाणी से मान्यता प्राप्त कलाकार पं. अवध सिंह ठाकुर ने गुरुवार को प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में “शास्त्रीय संगीत की वर्तमान चुनौतियां और समाधान” विषय पर अपनी बात रखते हुए शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और संगीतकारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की।उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत में डिग्री प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। केंद्रीय विद्यालयों को छोड़ दें तो अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में संगीत विषय के पर्याप्त पद नहीं हैं, जिससे प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था और समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।पं. ठाकुर ने कहा कि प्रसार भारती आकाशवाणी से मान्यता प्राप्त कलाकारों को भी नियमित कार्यक्रम नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोककलाओं के संरक्षण के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी समान रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि स्कूलों और महाविद्यालयों में संगीत विषय के नए पद सृजित किए जाएं, ताकि संगीत शिक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध हो सके।आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मानसिक तनाव, अवसाद और कुंठा का उल्लेख करते हुए पं. ठाकुर ने संगीत चिकित्सा (म्यूजिक थेरेपी) केंद्र स्थापित करने की भी मांग की। उनका कहना था कि संगीत मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम है और इसके लिए शासन को ठोस पहल करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार खेल और योग को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, उसी प्रकार शास्त्रीय संगीत की परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी सरकार के साथ-साथ सामाजिक संस्थाओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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