श्राद्ध एवं पितृ पूजन का विशेष महत्वसनातन धर्म में श्राद्ध और पितृ पूजन का विशेष महत्व माना गया है। यह अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन कराने से पूर्वजों के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन होता है।श्राद्ध के अवसर पर जल तर्पण, पिंडदान, अन्न-वस्त्र दान और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे परिवार में पितरों का आशीर्वाद बना रहता है और सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की जाती है।श्राद्ध का मूल भाव केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, परिवार और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। यह नई पीढ़ी को भी अपने परिवार की परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का अवसर देता है। 🙏॥ ॐ पितृभ्यो नमः ॥पितृ देवों को श्रद्धापूर्वक नमन।














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