रायपुर में सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर पर FIR, पुराने वीडियो को 15 अगस्त का बताकर शेयर करने का आरोप।

18 अगस्त 2026/रायपुर।

रायपुर स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक से जुड़ा एक वीडियो साझा करने के मामले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सोशल मीडिया-डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर के खिलाफ रायपुर के सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।मामला धमतरी जिले के कुरूद से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर से जुड़े एक वीडियो का है। भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक की शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह का बताकर साझा किया गया, जबकि भाजपा की ओर से दावा किया गया कि यह वीडियो 22 मार्च 2026 को आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम का है।तिरंगे की जगह भाजपा का झंडा फहराने का लगाया गया था आरोपशिकायत के मुताबिक, वीडियो के आधार पर यह संदेश देने की कोशिश की गई कि स्वतंत्रता दिवस के दिन भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की जगह पार्टी का झंडा फहराया। सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। भाजपा ने इसे भ्रामक और पुराने वीडियो को नए संदर्भ में पेश करने का आरोप लगाया।अजय चंद्राकर ने दी सफाईविवाद बढ़ने के बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल वीडियो स्वतंत्रता दिवस का नहीं, बल्कि 22 मार्च को आयोजित भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रम का है। उनका कहना था कि 15 अगस्त को उन्होंने धमतरी के एकलव्य खेल मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और तिरंगे को सलामी दी थी।BNS की धाराओं में मामला दर्जभाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक की शिकायत पर रायपुर के सिविल लाइन थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4), 353(2) और 196 के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। एफआईआर में सुप्रिया श्रीनेत, नेहा सिंह राठौर और एक सोशल मीडिया हैंडल का भी उल्लेख किया गया है।मामले में पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल एफआईआर शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर दर्ज हुई है; आरोपों की अंतिम सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की सत्यता और उसके संदर्भ को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है।

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