श्री शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजनछत्तीसगढ़ के ग्राम अर्जुनी (बालसमुंद )जिला बेमेतरा अर्जुनी में 24 मई से 31 में तक दोपहर 2 बजे से हरि इच्छा तक ,जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ (बद्रीकाश्रम) के वर्तमान और 46वें शंकराचार्य हैं।, ओर दंडी स्वामी श्रीमज्जयोतिर्मयानंद सरस्वती जी महाराज और छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित सलधा ग्राम (सपाद लक्षेश्वर धाम) श्री बलराम साहू, सरस्वती, रामहीन बाई समस्त ग्राम अर्जुनी और क्षेत्रवासी के विशेष सहयोग से आयोजित किया गया है, हरिहरात्मक रूद्र महायज्ञ एवं श्रीशिवमहापुराण कथा एक अत्यंत भव्य और अत्यंत पवित्र धार्मिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत पारंपरिक रूप से मंगल कलश यात्रा के साथ शुरू की गई जिसमें सैकड़ो महिला पुरुष केसरिया वस्त्र धारण कर सिर पर महिला कलेश लेकर चल रही थी सनातन धर्म में इस तरह के महायज्ञों और कथाओं का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है, भव्य कलश यात्रा निकाली जाती है। इसमें पीतवस्त्र (पीले कपड़े) धारण किए महिलाएं सिर पर पानी से भरा कलश लेकर पूरे गांव या क्षेत्र में भ्रमण करती, इसे पूरे क्षेत्र के शुद्धिकरण और देव-आवाहन का प्रतीक माना जाता है।हरिहरात्मक रूद्र महायज्ञ: ‘हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘हर’ (भगवान शिव) के एकाकार रूप को हरिहर कहा जाता है। यह महायज्ञ सृष्टि के इन दो मुख्य संहारक और पालनकर्ता देवों की एकता को दर्शाता है, जिससे समाज में समन्वय और शांति स्थापित होती है।श्रीशिवमहापुराण कथा: यज्ञ के साथ-साथ प्रतिदिन श्री शिव महापुराण की संगीतमय कथा का वाचन होता है। भक्तगण शिव जी के विविध अवतारों, लीलाओं और 7 संहिताओं के गूढ़ रहस्यों को श्रवण करते हैं।हवन एवं पूर्णाहुति: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ कुंड में आहुतियां दी जाती हैं, और अंतिम दिन भव्य पूर्णाहुति व महाभंडारे (प्रसाद वितरण) के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा है।














