78 घंटे बाद ब्लू वाटर में मिला आदिल का शव, रेस्क्यू सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल।

रायपुर/23अगस्त 2026

राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित ब्लू वाटर प्वाइंट में तीन दिन पहले डूबे युवक आदिल का शव आखिरकार हादसे के करीब 78 घंटे बाद शनिवार रात 12 बजे बरामद कर लिया गया। लंबे समय तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद शव मिलने से परिजनों का इंतजार खत्म हुआ, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि आदिल के पानी में डूबने के बाद से ही SDRF समेत रेस्क्यू टीमों द्वारा लगातार तलाश की जा रही थी। परिजन तीन दिनों तक मौके पर डटे रहे और हर गुजरते घंटे के साथ बेटे के शव के बाहर आने का इंतजार करते रहे।60 फीट की गहराई तक ही सीमित संसाधन?इस हादसे के बाद रेस्क्यू संसाधनों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि राजधानी रायपुर की टीम के पास पर्याप्त अंडरवाटर सर्च उपकरण उपलब्ध नहीं थे और करीब 60 फीट तक पानी के भीतर तलाश करने वाले अंडरवाटर कैमरे के लिए दूसरे जिलों से मदद लेनी पड़ी।वहीं, स्कूबा डाइविंग के जरिए तलाशी अभियान चलाने वाले जवानों की प्रशिक्षण क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि गोताखोरों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ करीब 60 फीट तक की गहराई में ही उतरने का प्रशिक्षण मिला है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि राजधानी के प्रमुख रेस्क्यू दल के पास पर्याप्त आधुनिक उपकरण और गहरे पानी में खोजबीन के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ नहीं हैं, तो आपदा के समय त्वरित कार्रवाई कैसे होगी?तीन दिन तक बेटे के शव का इंतजार करता रहा परिवारआदिल के परिजनों के लिए ये 78 घंटे किसी भयावह इंतजार से कम नहीं रहे। उन्हें मालूम था कि हादसे के बाद उनके बेटे के जीवित बचने की संभावना बेहद कम है, लेकिन फिर भी उनकी एकमात्र उम्मीद यही थी कि उसका शव जल्द से जल्द बाहर निकले, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सके।तीन दिनों तक परिवार जिस मानसिक पीड़ा से गुजरा, उसने रेस्क्यू सिस्टम की संवेदनशीलता और तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।करोड़ों के बजट और हाईटेक दावों के बीच जमीनी हकीकत पर सवालराज्य में आपदा प्रबंधन को आधुनिक बनाने और करोड़ों रुपये के संसाधन उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं। लेकिन राजधानी में ही यदि एक युवक के शव की तलाश के लिए तीन दिन लग जाएं और आवश्यक उपकरण दूसरे जिलों से मंगाने पड़ें, तो निश्चित तौर पर सिस्टम की तैयारियों की समीक्षा जरूरी है।अब सवाल सिर्फ आदिल के शव की बरामदगी का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार है?सरकार और संबंधित विभाग को इस पूरे मामले की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि रायपुर जैसे राजधानी शहर में गहरे जलाशयों में रेस्क्यू के लिए पर्याप्त अंडरवाटर कैमरे, प्रशिक्षित स्कूबा डाइवर्स और आधुनिक खोज उपकरण क्यों उपलब्ध नहीं थे।आदिल का शव 78 घंटे बाद मिल गया, लेकिन इस हादसे ने व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—अगर राजधानी में ही रेस्क्यू सिस्टम इतना सीमित है, तो प्रदेश के दूरदराज इलाकों में आपदा के समय आम लोगों की सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *