रायपुर। राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित अपने भीतर एक सदी से अधिक पुराना इतिहास समेटे हुए है। आम लोगों के बीच फ्रीमेसनरी को लेकर कई तरह की धारणाएं देखने को मिलती हैं, लेकिन संगठन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार फ्रीमेसनरी मूल रूप से नैतिक मूल्यों, भाईचारे, आत्म-विकास, सम्मान और समाज सेवा पर आधारित एक वैश्विक फ्रेटरनिटी है।1911 में रायपुर में रखी गई थी नींवरायपुर की फ्रीमेसनरी के इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव फरवरी 1911 माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरण के अनुसार रायपुर में लॉज की स्थापना इसी समय हुई थी। ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया की आधिकारिक सूची में यह संस्था “Chhattisgarh” Lodge No. 85 के नाम से दर्ज है और इसे वेस्टर्न रीजन के अंतर्गत रखा गया है।एक अन्य ऐतिहासिक स्रोत में भी उल्लेख है कि 1911 में रायपुर में Lodge Chattisgarh No. 3507 का गठन हुआ था। बाद में 1961 में ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया के गठन के बाद यह लॉज उसके अधीन आ गया और वर्तमान सूची में No. 85 के रूप में दर्ज है।फ्रीमेसनरी का भारत से पुराना रिश्ताभारत में फ्रीमेसनरी का इतिहास रायपुर से कहीं पुराना है। ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया के अनुसार भारत में इसकी संगठित गतिविधियों का इतिहास 18वीं शताब्दी तक जाता है। वर्ष 1729 में फोर्ट विलियम, कलकत्ता में एक प्रोविंशियल ग्रैंड लॉज के गठन का उल्लेख मिलता है। इसके बाद ब्रिटिश भारत में सेना, रेलवे और प्रशासन से जुड़े लोगों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर लॉज स्थापित होते गए।स्वतंत्रता के बाद भारत में एक संप्रभु राष्ट्रीय ग्रैंड लॉज की आवश्यकता महसूस की गई और 24 नवंबर 1961 को नई दिल्ली के अशोक होटल में Grand Lodge of India का गठन हुआ। उस समय भारत में मौजूद 277 लॉजों में से 145 लॉज नए ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया के साथ जुड़े।रायपुर का लॉज किस क्षेत्र के अंतर्गत आता है?रायपुर की संस्था Regional Grand Lodge of Western India के प्रशासनिक क्षेत्र में आती है। इस क्षेत्र में महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा कुछ केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। क्षेत्रीय ग्रैंड लॉज ऑफ वेस्टर्न इंडिया का गठन भी 6 दिसंबर 1961 को मुंबई में हुआ था।ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया की आधिकारिक सूची में Chhattisgarh Lodge No. 85 — Raipur, Chhattisgarh के रूप में दर्ज है।आखिर फ्रीमेसनरी है क्या?ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया फ्रीमेसनरी को दुनिया की सबसे पुरानी धर्मनिरपेक्ष फ्रेटरनल सोसाइटियों में से एक बताता है। इसके अनुसार इसका आधार ईश्वर की पितृभावना और मानवता के भाईचारे की अवधारणा है। सदस्यों को प्राचीन प्रतीकों, रूपकों और अनुष्ठानों के माध्यम से नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा दी जाती है।फ्रीमेसनरी में पुराने राजमिस्त्रियों के औजारों और निर्माण की परंपराओं को प्रतीकात्मक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यहां “निर्माण” का अर्थ केवल भवन निर्माण नहीं बल्कि व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व के निर्माण से भी जोड़ा जाता है।तीन प्रमुख मूल सिद्धांतफ्रीमेसनरी की शिक्षाओं में मुख्य रूप से तीन मूल विचारों को प्रमुखता दी जाती है—भ्रातृ प्रेम — सभी मनुष्यों के प्रति भाईचारे, सहिष्णुता और सम्मान की भावना।राहत/सहायता — जरूरतमंदों की सहायता, परोपकार और सामुदायिक सेवा।सत्य — नैतिक जीवन, आत्म-विकास और सत्य की खोज।ग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया अपनी मौजूदा मूल्यों की सूची में Integrity, Friendship, Respect और Charity को भी प्रमुखता देता है।रायपुर के ऐतिहासिक भवन की खासियतरायपुर के सिविल लाइंस स्थित फ्रीमेसन हॉल इस पुरानी परंपरा से जुड़ा प्रमुख स्थल है। स्थानीय विरासत संबंधी दस्तावेजों में रायपुर के लॉज की स्थापना 1911 में होने का उल्लेख मिलता है। इस तरह यह संस्था रायपुर के आधुनिक शहरी इतिहास के शुरुआती दौर से जुड़ी हुई है।देशभर में फैला नेटवर्कग्रैंड लॉज ऑफ इंडिया के वर्तमान आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देश में 450 से अधिक लॉज और 200 से अधिक अन्य मेसोनिक संस्थाएं हैं तथा कुल सदस्यता करीब 25,000 बताई गई है। ये संस्थाएं भारत के विभिन्न शहरों में कार्यरत हैं।सेवा और समाज के प्रति योगदानफ्रीमेसनरी की आधिकारिक जानकारी में परोपकार और जरूरतमंदों की सहायता को संगठन के मूल मूल्यों में शामिल किया गया है। संगठन के अनुसार चैरिटी और सामुदायिक योगदान इसकी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हालांकि फ्रीमेसनरी की कई गतिविधियां संगठनात्मक नियमों और निजी बैठकों के दायरे में होती हैं, इसलिए इनके बारे में सार्वजनिक जानकारी सीमित भी हो सकती है।रायपुर की विरासत का एक अनोखा अध्यायरायपुर में 1911 से चली आ रही Lodge Chhattisgarh No. 85 केवल एक संगठन का इतिहास नहीं बल्कि शहर के औपनिवेशिक दौर से लेकर स्वतंत्र भारत तक के सामाजिक इतिहास का भी एक हिस्सा है। एक सदी से अधिक समय में इसकी परंपरा कई पीढ़ियों तक पहुंची है।फ्रीमेसनरी को समझने के लिए इसे केवल रहस्यमयी संगठन के रूप में देखने के बजाय इसके घोषित सिद्धांतों—नैतिक जीवन, भाईचारा, आत्म-विकास, सम्मान और सेवा—के संदर्भ में देखना अधिक उपयोगी है। रायपुर का फ्रीमेसन हॉल इसी लंबे इतिहास और परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्थानीय प्रतीक है।



















