मां बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल 2026 को मनाई जा रही है । आठवीं महाविद्या के रूप में, वे शत्रुओं को पंगु बनाने, बाधाओं को दूर करने और विजय सुनिश्चित करने की सर्वोच्च शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। भक्त पीले वस्त्र पहनते हैं, पीले फूल/हल्दी चढ़ाते हैं और सुरक्षा और सफलता की कामना के लिए “ॐ ह्रीं बगलामुखी नमः” का जाप करते हैं

नलखेड़ा (Nalkheda) स्थित माँ बगलामुखी मंदिर मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले में लखुंदर नदी के किनारे स्थित एक अत्यंत प्राचीन और सिद्धपीठ मंदिर है, जो उज्जैन से लगभग 100-105 किलोमीटर की दूरी पर है। यह मंदिर महाभारत काल से संबंधित माना जाता है और तांत्रिक साधना के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। माँ बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा की मुख्य बातें:महत्व और मान्यता: माँ बगलामुखी (पीतांबरा देवी) दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं, जो शत्रुओं का नाश करने, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय पाने और व्यापार में बाधाओं को दूर करने के लिए पूजी जाती हैं।इतिहास: मान्यताओं के अनुसार, इस स्वयंभू (स्वयं प्रकट) मंदिर की स्थापना महाभारत युद्ध से पहले भगवान कृष्ण की सलाह पर युधिष्ठिर ने की थी।मंदिर परिसर: मंदिर में तीन मुख वाली त्रिशक्ति बगलामुखी देवी के साथ-साथ महालक्ष्मी, सरस्वती, कृष्ण, हनुमान और भैरव की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।हवन-पूजन: यहाँ भक्तों द्वारा विशेष रूप से पीतांबरा साधना और हवन किए जाते हैं, जो मनोकामना पूर्ति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।दर्शन समय: मंदिर में सुबह की आरती 6:00 बजे और शाम की आरती 7:00 बजे होती है। दर्शन का समय सामान्यतः सुबह 6:30 से रात 10:00 बजे तक रहता है।स्थान और पहुंच:यह उज्जैन से लगभग 2 घंटे और भोपाल से लगभग 182 किमी दूर है।निकटतम रेलवे स्टेशन उज्जैन है।अमला (Amla) से दाहिनी ओर मुड़कर 15 किमी की दूरी पर नलखेड़ा पहुंचा जा सकता।

हिंदू धर्म में दस दशा महाविद्याओं(तांत्रिक देवियों) में से आठवीं देवी मां बगलामुखी हैं , जिन्हें शक्ति, संरक्षण और विजय की देवी के रूप में पूजा जाता है। स्तंभन(पंगु बनाने/नियंत्रित करने) की देवी के रूप में जानी जाने वाली , वे नकारात्मक शक्तियों को रोकती हैं, शत्रुओं को शांत करती हैं और बुराई को निष्प्रभावी करती हैं। उन्हें अक्सर पीले रंग में चित्रित किया जाता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए पूजा जाता है।
माँ बगलामुखी नकारात्मक शक्तियों को नियंत्रित करने या रोकने की शक्ति का प्रतीक है, उनके नाम “बागला” का अर्थ लगाम और “मुखी” का अर्थ चेहरा है। वह मुकदमों और प्रतियोगिताओं में जीत दिलाने के लिए भी जानी जाती हैं।
प्रतीकात्मकता और स्वरूप: उन्हें अक्सर शत्रु की जीभ पकड़े हुए और हाथ में गदा उठाए हुए दिखाया जाता है, जो उनकी वाणी और क्रियाओं पर नियंत्रण रखने की क्षमता का प्रतीक है। उनका संबंध पीले रंग (पीतांबर) से है।
पूजा एवं मंत्र: बगलामुखी मंत्र का प्रयोग सुरक्षा के लिए किया जाता है, और उनकी पूजा में अक्सर पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले रंग की भेंट शामिल होती है। एक सामान्य मंत्र है: ओम ह्रीं बगलामुखी नमः।
महत्वपूर्ण मंदिर: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले (बनखंडी) में श्री बगलामुखी माता मंदिर एक प्रमुख, मान्यता प्राप्त सिद्धपीठ है। एक और महत्वपूर्ण मंदिर मध्य प्रदेश के दतियामें है , जिसे पीतांबरा पीठ के नाम से जाना जाता है।
किंवदंती: पौराणिक कथा के अनुसार, जब एक भयंकर तूफान ने ब्रह्मांड को नष्ट करने की धमकी दी, तो देवी बगलामुखी एक स्वर्णिम झील (हरिद्रा सरोवर) से प्रकट हुईं और संतुलन बहाल करने और विनाश को शांत करने में सहायक हुईं।
उनकी पूजा को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और इसका उद्देश्य बाधाओं को दूर करना और आंतरिक या बाहरी शत्रुओंपर विजय प्राप्त करना है ।

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