एथनॉल का चुल्ला है जो बिल्कुल प्रदूषण भी नहीं करता,

ये एथनॉल का चुल्ला है जो बिल्कुल प्रदूषण भी नहीं करता है ये केन्या में पिछले 15 साल से 50 लाख से ज़्यादा परिवार इस्तेमाल करते है । koko एक भारतीय कंपनी है जिसने इसका अविष्कार किया था देश में कार्बन कम करने वाला फ्यूल और चुल्ला जिसके लिए उस कंपनी को कार्बन क्रेडिट भी मिलता था । अभी दो साल से कार्बन क्रेडिट मिलना बंद हो गया जिससे कंपनी बंद हो गई है । हमारी मीटिंग कंपनी के सभी वरीय अधिकारी और डायरेक्टर से हुआ था 4 दिन पहले zoom कॉल में । अगर भारत सरकार जल्दी पहल करे तो आज एलपीजी के संकट से बिल्कुल बाहर आ सकते है । हमारे देश में अभी प्रति वर्ष 2000 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन हो रहा है जिसमे 1200 करोड़ लीटर पेट्रोल में मिक्स होता है और 800 करोड़ लीटर एथनॉल का ख़रीदार नहीं है । जैसे बिहार में 2024 से 84 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन का लक्ष प्राप्त किया, नवंबर 2025 तक ओएमसी पूरा ख़रीद करता था , लेकिन आज महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र , तेलंगाना, छत्तीसगढ़ में बहुत सारे एथनॉल के नए प्लांट लग गए है । जिससे बिहार के 11 एथनॉल प्लांट का एलोकेशन 50% 39 करोड़ हो गया है । आज लगभग 11 प्लांट महीने में 12 दिन लगभग एवरेज चल पा रहे है या कैपिसिटी 50% कर चला रहे है एथनॉल कंपनी को भारी नुक़सान भी हो रहा है , स्टाफ का सैलेरी एवम् बैंक का ईएमआई देना मुस्किल हो रहा है । अगर एथनॉल का इस्तेमाल कुकिंग फ्यूल में होने लगेगा तो भारत पूर्ण रूप से स्वदेशी ईंधन पर निर्भर हो सकता है । जरूरत है सरकार को तेजी से पहल करना । एक डेमो लेकर पूरी प्रक्रिया वितरण प्रणाली बना कर किया जा सकता है । इसमें सभी का भला है देश का भी लोगों का भी ,एथनॉल उद्योग का भी ,किसान का भी (आज मक्का का भाव 15-18 )इंडियन आयल के CGM सिद्धार्थ मोइत्रा जी ने केन्या में विजिट भी किया और देखा 100% सक्सेस है । मैं माननीय सरकार से आग्रह करता हूँ कि आज सरकार कोयला से खाना बनाने का आदेश दे रही है सरकार को एथनॉल चुल्ला और वितरण प्रणाली पर काम करना चाहिए ।

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