तस्वीर छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले सरगुजा जिले के मैनपाट की है.. ₹500 प्रतिमाह का पेंशन लेने के लिए बहू अपनी दिव्यांग सास को पीठ पर लाद कर बैंक जाने को मजबूर है.।

ये तस्वीर छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले सरगुजा जिले के मैनपाट की है.. ₹500 प्रतिमाह का पेंशन लेने के लिए बहू अपनी दिव्यांग सास को पीठ पर लात कर 15 किलोमीटर का सफर तय कर बैंक जाने को मजबूर है.
सरकार बैठकर ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘घर-पहुंच सेवा’ के बड़े-बड़े विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च रही हैं, लेकिन हकीकत तस्वीर बयां कर रही है..
मैनपाट ब्लॉक के ग्राम कुनिया जंगलपारा का है जहां की रहने वाली आदिवासी बहू सुखमनिया बाई पिछले कई महीनों से अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास को इसी तरह पीठ पर ढोने पर मजबूर है, ताकि इस उम्र में उनके जिंदा रहने का सहारा न छिन जाए. यही कारण है कि पेंशन लेने के लिए और 90 वर्षीय बुजुर्ग सांस जिंदा है बैंक अधिकारियों को विश्वास दिलाने के उसे अपने कंधों में उठा कर पथरीले और दुर्गम रास्तों, नालों को पार करते हुए 5 किलोमीटर दूर ‘नर्मदापुर सेंट्रल बैंक’ पहुंचती है. जहां बैंक के अधिकारी 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला को जिंदा देख कर उसका पेंशन जारी करते हैं. ये तस्वीर 22 में 2026 की है जिस दिन सरगुजा जिले का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है. साभार सोशल मीडिया

हमको काकरोच या चिकन पार्टी नहीं बनानी है हमें इंसानियत की पार्टी बनानी है जो इस तरह अम्मा की पीड़ा समझ सके और ऐसी तस्वीर देश में कही न दिखे।।

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