रायपुर /19 अगस्त 2026
पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में गोवंश की बदहाली का एक गंभीर तस्वीर सामने आती है। प्रदेश में जगह-जगह सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी आम हो गई है। दिन के समय वाहन चालक किसी तरह इनसे बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में सड़क पर बैठे या घूमते गोवंश बड़े हादसों का कारण बन रहे हैं।विडंबना यह है कि जिस छत्तीसगढ़ को सरकारी गोठानों और गोधन संरक्षण की योजनाओं के लिए जाना जाता है, वहीं सड़कों पर बड़ी संख्या में गोवंश लावारिस हालत में दिखाई दे रहा है। कई मवेशी सड़क किनारे कचरा खाते, घायल अवस्था में पड़े या वाहनों के बीच भटकते नजर आते हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन गोवंशों को सड़कों पर छोड़ने वाले पशु मालिकों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती? यदि किसी वाहन की टक्कर से किसी व्यक्ति की जान चली जाए या कोई गंभीर रूप से घायल हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?गोवंश को खुले में छोड़ने की प्रवृत्ति न केवल पशुओं के लिए जानलेवा है, बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। प्रशासन और स्थानीय निकायों को ऐसे मामलों में प्रभावी निगरानी के साथ पशु मालिकों की पहचान कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।जरूरत इस बात की है कि गोवंश संरक्षण केवल योजनाओं और नारों तक सीमित न रहे, बल्कि सड़कों पर भटक रहे हर पशु की सुरक्षा और उसके मालिक की जवाबदेही सुनिश्चित हो। आखिर कब तक बेजुबान गोवंश सड़कों पर दुर्घटनाओं और मौत का शिकार होता रहेगा?जनता का सवाल साफ है—गोवंश को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होगी?















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