अयोध्या, 7 जुलाई 2026। सिखवाल ब्राह्मण समाज के आराध्य गुरु परमपिता श्री श्रंगी ऋषि महाराज की पावन तपोभूमि अयोध्या जिले की मिल्कीपुर तहसील के ग्राम शेरवा घाट में सरयू नदी के पवित्र तट पर स्थित है। यहां स्थित श्री श्रंगी ऋषि आश्रम समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जिसका संचालन श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास द्वारा किया जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संतान प्राप्ति की कामना लेकर अयोध्या के राजा दशरथ स्वयं पैदल चलकर गुरु श्रंगी ऋषि के आश्रम पहुंचे थे। गुरु महाराज ने यहां विधि-विधान से पुत्रेष्टि यज्ञ संपन्न कराया, जिसके फलस्वरूप भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। यज्ञ की दक्षिणा स्वरूप राजा दशरथ ने अपनी पुत्री माता शांता का विवाह गुरु श्रंगी ऋषि से किया। तभी से इस तपोभूमि पर गुरु श्रंगी ऋषि और माता शांता की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है।वाल्मीकि रामायण में भी इस स्थल का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि गुरु विश्वामित्र जब श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ लेकर निकले थे, तब वे इसी सरयू तट पर रुके थे। यहीं उन्होंने भगवान श्रीराम को राक्षसों से रक्षा करने वाली ‘बला’ और ‘अति बला’ विद्याओं का उपदेश दिया था।महबूबगंज से लगभग 3 किलोमीटर तथा अयोध्या शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस आश्रम परिसर में प्राचीन यज्ञ कुंड, संत कुटियां, ध्यान स्थल, श्री श्रंगी ऋषि-शांता मंदिर और सरयू स्नान घाट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन, पूजन और पवित्र सरयू स्नान के लिए पहुंचते हैं।आगामी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर देशभर में श्री श्रंगी ऋषि वंशजों एवं सिखवाल समाज द्वारा हवन-पूजन, गुरु वंदन, शोभायात्रा और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। गुरु पूर्णिमा महोत्सव को लेकर समाज में उत्साह का वातावरण है तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शेरवा घाट पहुंचने की संभावना है।
अयोध्या के शेरवा घाट में स्थित है सिखवाल समाज के आराध्य श्री श्रंगी ऋषि की तपोभूमि, गुरु पूर्णिमा पर होंगे विशेष आयोजन।
















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