धमतरी में स्वामित्व योजना का बड़ा कदम- 62 गांवों के नक्शे और संपत्ति विवरण जारी,

रायपुर, 12 जुलाई 2026

धमतरी में स्वामित्व योजना के तहत यह केंद्र सरकार की एक योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रोन तकनीक के माध्यम से गांवों की आवासीय भूमि की मैपिंग कर ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी प्रॉपर्टी कार्ड प्रदान करना है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के तहत धमतरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकाना हक निर्धारण की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। जिले के कुल 501 राजस्व गांवों में आधुनिक ड्रोन तकनीक से सर्वे का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसी कड़ी में, कार्यान्वयन एजेंसी सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रथम चरण में 62 गांवों के अधिकार अभिलेख (अधिकार पत्र) का प्रारंभिक प्रकाशन कर दिया गया है। इस प्रारंभिक प्रकाशन के तहत धमतरी, भखारा, कुकरेल, कुरूद, नगरी, बेलरगांव और मगरलोड क्षेत्र के चयनित गांवों को शामिल किया गया है। इन गांवों के कुल 219 शीटों के मसौदा मानचित्र (मैप-2) और संपत्ति धारकों का विस्तृत विवरण तैयार कर संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है, ताकि ग्रामीण अपनी संपत्तियों का मिलान कर सकें।*कलेक्टर के निर्देश- कोटवारों द्वारा मुनादी और आंकड़ों का सख्त सत्यापन* कलेक्टर ने इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के लिए राजस्व अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता के लिए मुनादी ग्राम कोटवारों के माध्यम से गांवों में मुनादी कराई जाए, जिससे अंतिम छोर के हितग्राही तक इसकी जानकारी पहुंचे। मैप-1 में पाई गई पूर्व की विसंगतियों का नए मैप-2 से सावधानीपूर्वक मिलान किया जाए। हल्का पटवारी द्वारा तैयार किए गए संपत्ति विवरण का सर्वे ऑफ इंडिया से प्राप्त डिजिटल आंकड़ों के साथ शत-प्रतिशत मिलान और सत्यापन सुनिश्चित हो।*दावेऔर आपत्तियों के लिए मिलेंगे 15 दिन* प्रारंभिक प्रकाशन की तिथि से 15 दिनों के भीतर कोई भी हितग्राही अपने दावे या आपत्तियां प्राधिकृत अधिकारी (राजस्व न्यायालय) के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है। समय-सीमा में प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार त्वरित निराकरण किया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति नहीं आती है, तो इसे अंतिम मानते हुए फाइनल श्अधिकार अभिलेखश् तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।*पारदर्शिता के लिए लंबित मामलों की सूची होगी संलग्न* अभिलेखों की शुद्धता और पारदर्शिता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि अंतिम अधिकार अभिलेख तैयार करते समय तहसीलदार न्यायालय में लंबित चल रहे जमीन संबंधी प्रकरणों की सूची (परिशिष्ट-9 के अनुसार) अनिवार्य रूप से संलग्न की जाए। अधिकारियों को स्वामित्व योजना के सभी चरणों को पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द उनकी संपत्ति का विधिक मालिकाना हक (प्रॉपर्टी कार्ड) मिल सके।

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