रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार ने प्रचार-प्रसार और विज्ञापनों पर ₹1,095 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं। इस आंकड़े को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख मिलता है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के अंतिम सात महीनों में औसतन ₹2.74 करोड़ प्रतिदिन विज्ञापनों पर खर्च किए गए थे। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में उनके पूरे कार्यकाल के दौरान संवाद एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से लगभग ₹3,000 करोड़ खर्च होने का भी उल्लेख किया गया है।ऐसे में सवाल केवल यह नहीं है कि किस सरकार ने कितना खर्च किया। सरकारें बदलती रहती हैं और हर सरकार अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन जारी करती है। लेकिन इस बहस के बीच उन हजारों श्रमजीवी पत्रकारों, छोटे समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, डिजिटल न्यूज़ पोर्टलों, कैमरामैन, फोटोग्राफरों, डिज़ाइनरों, प्रिंटिंग प्रेस और मीडिया से जुड़े अन्य कर्मचारियों की आजीविका पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जिनकी आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत सरकारी विज्ञापन होते हैं।पत्रकार भी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके परिवार, जिम्मेदारियां और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी अन्य नागरिक का। इसलिए सरकारी विज्ञापनों में खर्च होने वाले प्रत्येक सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता आवश्यक है। विज्ञापनों का वितरण स्पष्ट नीति के तहत हो, ताकि किसी भी मीडिया संस्थान के साथ भेदभाव न हो।इस संदर्भ में यह भी तर्क सामने आता है कि जितना बजट मीडिया विज्ञापनों को लेकर चर्चा में रहता है, उससे कहीं अधिक मूल्य की दवाइयां और अन्य सामग्री कई बार सरकारी अस्पतालों में समय पर उपयोग न होने के कारण एक्सपायर हो जाती हैं। ऐसे मुद्दों पर भी गंभीर विमर्श की आवश्यकता है।लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन मजबूत, स्वतंत्र और आर्थिक रूप से सक्षम पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। इसलिए बहस केवल विज्ञापन खर्च तक सीमित न रहकर पारदर्शी विज्ञापन नीति, मीडिया की आर्थिक मजबूती और पत्रकारों के भविष्य पर भी केंद्रित होनी चाहिए।
नोट: उपरोक्त लेख में पूर्ववर्ती सरकार के विज्ञापन व्यय संबंधी आंकड़े मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संदर्भित हैं। इनके संबंध में आधिकारिक












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