नई दिल्ली/रायपुर, 22 जुलाई।
रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में नियम 377 के तहत ग्रामीण भारत में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए ‘भारत चिकित्सा सेवा आयोग’ (Indian Medical Service Commission) के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।लोकसभा में अपने वक्तव्य के दौरान सांसद अग्रवाल ने कहा कि देश के लगभग 6.4 लाख गांवों में रहने वाली बड़ी आबादी आज भी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ समेत विशेषज्ञ चिकित्सकों के करीब 80 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे ग्रामीण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।उन्होंने छत्तीसगढ़ का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के 19,698 गांव, जिनमें बड़ी संख्या आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों की है, आज भी डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लोगों को मामूली इलाज के लिए भी शहरों का रुख करना पड़ता है।सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीण सेवा को अधिकांश चिकित्सक मजबूरी के रूप में देखते हैं। इसे सम्मानजनक और आकर्षक बनाने के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्रीय चिकित्सा सेवा आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए डॉक्टरों की भर्ती, प्रशिक्षण, पदस्थापना और सेवा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाले।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सबसे अधिक आवश्यकता है। यदि राष्ट्रीय स्तर पर समर्पित चिकित्सा सेवा कैडर तैयार किया जाए, तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी नियमित रूप से योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वस्थ भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब गांव के अंतिम व्यक्ति तक भी समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें।














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