अतिथि व्याख्याताओं ने सरकार के सामने रखीं छह प्रमुख मांगें, 1 अगस्त से 11 माह की नियुक्ति देने की मांग।

30 जुलाई/ रायपुर

रायपुर। छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता पीएचडी, नेट, सेट कल्याण संघ, रायपुर ने राज्य सरकार एवं उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए छह प्रमुख मांगें रखी हैं। संघ का कहना है कि नई अतिथि व्याख्याता नीति 2026 (संशोधित) लागू होने के बावजूद अभी तक सत्र 2026-27 के लिए नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं, जिससे हजारों अतिथि व्याख्याताओं के सामने रोजगार और आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।संघ ने मांग की है कि अतिथि व्याख्याताओं को ₹50,000 का एकमुश्त मासिक मानदेय दिया जाए। उनका तर्क है कि प्रतिदिन ₹2,000 की दर तय होने के बावजूद रविवार, सार्वजनिक अवकाश और अन्य छुट्टियों के कारण पूरा मानदेय नहीं मिल पाता। साथ ही उन्होंने महिला अतिथि व्याख्याताओं के लिए नियमित कर्मचारियों की तरह सवैतनिक मातृत्व अवकाश देने की भी मांग की है।संघ ने 65 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा, लोक सेवा आयोग एवं अतिथि व्याख्याता नियुक्तियों में छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को प्राथमिकता, सहायक प्राध्यापक भर्ती में 15 से 20 बोनस अंक, तथा अधिकतम आयु सीमा में विशेष छूट देने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी है। उनका कहना है कि कई अतिथि व्याख्याता 15 से 20 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहे हैं और उनके अनुभव को भर्ती प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।संघ का कहना है कि आयुक्त, उच्च शिक्षा द्वारा जारी शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार 1 जुलाई 2026 से अध्यापन कार्य प्रारंभ होना था, लेकिन 30 जुलाई तक भी अधिकांश शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता पीएचडी, नेट, सेट कल्याण संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि 1 अगस्त 2026 को राज्य के सभी शासकीय महाविद्यालयों में स्पष्ट आदेश जारी कर सभी अतिथि व्याख्याताओं, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ाधिकारियों को एक साथ 11 माह के लिए नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि शैक्षणिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।

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