रायपुर, 4 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के तहत संचालित वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति, पनचक्की की महिलाओं ने वनोपज से मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि समाज में नई पहचान भी बनाई है।समिति की अध्यक्ष श्रीमती कांता बाई के नेतृत्व में उरांव जनजाति की महिलाओं ने प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक की मदद से च्यवनप्राश सहित कई हर्बल उत्पादों का निर्माण शुरू किया। पहले ये महिलाएं केवल वनोपज संग्रह पर निर्भर थीं, लेकिन अब वे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और TRIFED के सहयोग से महिलाओं को उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग, विपणन और आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही आवश्यक मशीनें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में उनकी मांग बढ़ी।महिलाओं द्वारा तैयार किए गए च्यवनप्राश और अन्य हर्बल उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारे गए, जिन्हें उपभोक्ताओं से अच्छा प्रतिसाद मिला। इसका परिणाम यह रहा कि मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र, पनचक्की ने 1.91 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया।इस सफलता ने महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। श्रीमती कांता बाई का नेतृत्व आज अन्य ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।यह सफलता दर्शाती है कि वन धन विकास योजना केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है।
वन धन योजना से बदली जशपुर की महिलाओं की तकदीर, च्यवनप्राश बनाकर 1.91 करोड़ का कारोबार।













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