छत्तीसगढ़ की शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित।

23 अगस्त 2026/रसारंगढ़ बिलाईगढ़

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए देशभर से 48 शिक्षकों का चयन किया है। इनमें छत्तीसगढ़ से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की शिक्षिका सुनीता यादव का चयन हुआ है। वह बरमकेला विकासखंड के प्राथमिक शाला खिचरी में पदस्थ हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
सुनीता यादव को एक नवाचारी शिक्षिका के रूप में जाना जाता है। वह कक्षा में पीछे रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास करती हैं। साहित्य को शिक्षा से जोड़कर बच्चों को अनुभव आधारित शिक्षा देने की दिशा में भी उनका विशेष योगदान रहा है।
साहित्य के क्षेत्र में भी मिली पहचान
शिक्षिका सुनीता यादव को वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र के चार प्रमुख सम्मानों में शामिल पं. मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वह राज्यपाल शिक्षक सम्मान भी प्राप्त कर चुकी हैं।
बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
सुनीता यादव शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण को भी अपनी जिम्मेदारी मानती हैं। बच्चों को बेहतर पोषण और उत्तम स्वास्थ्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वह अपने खर्च पर नियमित रूप से बच्चों को दूध वितरित करती हैं। इसके साथ ही अधिक से अधिक न्योता भोजन के माध्यम से विद्यार्थियों के पोषण आहार को बेहतर बनाने के लिए भी प्रयास करती हैं।
उनका मानना है कि स्वस्थ और पोषित बच्चे ही शिक्षा को बेहतर तरीके से ग्रहण कर सकते हैं। इसी सोच के साथ वह विद्यालय में पढ़ाई के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी काम कर रही हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर शोध पत्र
सुनीता यादव की उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण कार्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलावों पर किया गया शोध कार्य भी है। उन्हें जिले की पहली महिला शिक्षिका बताया जा रहा है, जिन्होंने इस विषय पर शोध पत्र तैयार किया है।
नवाचार और अनुभव आधारित शिक्षा बनी पहचान
सुनीता यादव बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गतिविधियों और अनुभवों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर देती हैं। साहित्य, रचनात्मक गतिविधियों और स्थानीय परिवेश को शिक्षा से जोड़कर वह विद्यार्थियों में सीखने की रुचि विकसित करने का प्रयास करती हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन होने पर शिक्षा जगत, विद्यालय परिवार और जिले में खुशी का माहौल है। सुनीता यादव का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान है, बल्कि छत्तीसगढ़ की नवाचारी और समर्पित शिक्षण परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान भी है।

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