रायपुर, 21 अगस्त 2026
पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने शक्कर और गुड़ की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और हिंदुओं के प्रमुख त्योहार शुरू होने से पहले शक्कर के दामों में तेजी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि त्योहारों की मिठास शक्कर की बढ़ती कीमतों ने फीकी कर दी है।विकास उपाध्याय ने कहा कि उत्पादन और बाजार में उपलब्ध स्टॉक में कमी के कारण शक्कर की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। कई चीनी मिलों में स्टॉक खत्म होने की स्थिति है, वहीं मौसम के कारण इस वर्ष गन्ने के उत्पादन को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं। उनका दावा है कि गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ने का सीधा असर बाजार कीमतों पर दिखाई दे रहा है।चार साल में चीनी निर्यात का आंकड़ा शून्य होने का दावाउपाध्याय ने कहा कि चीनी के उत्पादन और उपलब्धता पर दबाव का असर निर्यात पर भी पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि चार साल पहले देश से करीब 1.33 करोड़ टन चीनी का निर्यात होता था, जो अब शून्य हो गया है। उन्होंने एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और उससे प्राप्त शर्करा के इस्तेमाल को भी घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित होने की एक वजह बताया।उन्होंने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर के बयान का हवाला देते हुए कहा कि संगठन की ओर से पहले भी एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है।शक्कर 70 रुपये किलो तक पहुंचने का दावाविकास उपाध्याय ने कहा कि कुछ बाजारों में एक ही दिन में शक्कर के दाम में करीब 10 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार वर्तमान में शक्कर की कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसके साथ ही गुड़ के दामों में भी तेजी आई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिन पहले करीब 60 रुपये किलो बिकने वाला गुड़ अब लगभग 100 रुपये किलो तक पहुंच गया है।शक्कर और गुड़ की कीमतों में बढ़ोतरी का असर चाय दुकानों, हलवाई, बेकरी और खाद्य सामग्री बनाने वाले कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। लागत बढ़ने के कारण कारोबारियों को अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।E20 पेट्रोल को लेकर भी सरकार पर निशानाविकास उपाध्याय ने E20 पेट्रोल को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के कुछ पार्ट्स पर असर पड़ सकता है, माइलेज में कमी आ सकती है और इंजन संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों को रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को लेकर वाहन मालिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रैवल्स संचालकों और वाहन मैकेनिकों द्वारा E20 को लेकर जताई जा रही चिंताओं का भी उल्लेख किया।रायपुर उपभोक्ता आयोग के फैसले का दिया हवालाउपाध्याय ने रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद एक उपभोक्ता की कार में बार-बार तकनीकी खराबी और मिसफायरिंग की समस्या सामने आई थी। उन्होंने दावा किया कि मामले में उपभोक्ता आयोग ने कंपनी और संबंधित डीलर को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई कार उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।उपाध्याय ने सरकार से E20 पेट्रोल को लेकर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन उपभोक्ताओं को E20 के इस्तेमाल से परेशानी हो रही है, उनकी शिकायतों का तत्काल संज्ञान लिया जाना चाहिए। साथ ही उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने और वाहन मालिकों को संभावित नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट नीति तैयार करने की मांग की।उन्होंने कहा कि सरकार को महंगाई और ईंधन से जुड़े मुद्दों पर जनता के हित में तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए, ताकि त्योहारों के समय आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।













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