भ्रष्टाचार का पीपीपी मॉडल अस्पतालों की पैथोलॉजी ठेके पर,कमीशनखोरी का अभिनव प्रयास छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग का कहा छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मीडिया विभाग की टीम के प्रवक्ता ने कहा की छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का पीपीपी मॉडल अस्पतालों की पैथोलॉजी ठेके पर**कमीशनखोरी का अभिनव प्रयास छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग का,

*रायपुर/13 अप्रैल 2026

अस्पतालों की पैथोलॉजी ठेके पर दिये जाने पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि यह भ्रष्टाचार का पीपीपी मॉडल है, कंडोम बनाने वाली कंपनी को टेस्ट का ठेका दे दिया। यह कंपनी है तो सरकारी, लेकिन ठेकेदार से काम करायेगी। लैब की जगह, कर्मचारी लगने वाली मशीनें सभी सरकार मुफ्त में देगी और ठेका कंपनी जांच करेगी और जांच में लगने वाली फीस का भुगतान भी सरकार करेगी। यह ठेका स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार का अभिनव पहल है। स्वास्थ्य विभाग लोगो के इलाज की दिशा तय करने नही भ्रष्टाचार करने की रोज नये अवसर खोजता है। बिना किसी टेंडर के एच.एल.एन को ठेका दिया तथा एच.एल.एन ने महाराष्ट्र की कंपनी को ठेका दे दिया।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि जब मशीने सरकारी है, लैब के लिये स्थान भी सरकार देगी तथा टेक्नीशियन भी सरकार ही देगी तथा जांच की फीस भी सरकारी है तो ठेका कंपनी को केवल बिल काटने के लिये रखा गया है। राज्य में जब से भाजपा की सरकार बनी है, स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है। भ्रष्टाचार स्वास्थ्य विभाग की पहचान बन गयी है।प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि पैथालॉजी ठेको को निरस्त करने की मांग कांग्रेस पार्टी करती है, सरकार प्रदेश के सभी अस्पतालों के पैथालॉजी का संचालन खुद करवाये, ठेके और कमीशनखोरी के खेल पर रोक लगाई जाये। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि दवा के नाम पर ज़हर दिया जा रहा है, नकली अमानक, गुणवत्ताहीन, फंगस लगे दवा का वितरण मरीजों को किया जा रहा था, इतने गंभीर विषय पर यह सरकार गंभीर नहीं है, महिनो बाद तक न किसी की जिम्मेदारी तय की गई, न ही कोई कार्यवाही हुई। छोटे-छोटे बच्चों को जो कृमि की जो दवाइयां खिलाई गई हैं, जांच में अमानक पाया गया, डायरिया पीड़ित मरीजों को दी गई दवाओं में फंगस मिला, कई एंटीबायोटिक दवाओं से मरीजों को एलर्जी हो रही है, गर्भवती महिलाओं और माताओं को बांटी गई आयरन, सल्फेट और फोलिक एसिड की दवाएं गुणवत्ताहीन पाई गई। सरकारी अस्पतालों में फफूंद लगे ग्लूकोस बोतल चढ़ाने से मरीजों की तबियत खराब हो रही है। पेरासिटामोल से लेकर सर्जिकल ब्लेड तक, एल्बेंडाजोल से लेकर प्रेगनेंसी कीट तक अमानक निकले। आज तक उस पर कार्यवाही नही करवाई गयी है।

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