छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत छिपनी पानी गांव की तस्वीर कई सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक ओर सरकार आदिवासी विकास, हर घर जल और पीएम जनमन योजना के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी कोरवा समुदाय आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस संकट का असर सीधे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ रहा है। क्या प्रशासन को किसी बड़ी बीमारी या हादसे का इंतजार है? आखिर जिन योजनाओं के करोड़ों रुपये खर्च होने की बात कही जाती है, उनका लाभ जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा? छिपनी पानी गांव की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि विकास के दावे और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर है। सवाल यह भी है कि आखिर आदिम जनजाति कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा परिवारों की सुध लेने जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे और क्या हर वर्ष चलने वाले सुशासन तिहार में इस तस्वीर की भी तकदीर बदलेगी कभी,गर्मी का दिन है ऐसी कई तस्वीर नजर आती है शहर ओर गांवों में मगर सरकारी अमले को ऐसी तस्वीरें की समस्याओं का समाधान जरूर करना चाहिए़।















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