छत्तीसगढ़ में अवैध रेत और शराब में खूनी हिंसा, कार में जिंदा जलाकर मार दिया कोरिया में भाजपा नेता को घटना में दो लोगों की मौत हो चुकी।

छत्तीसगढ़ : अवैध रेत खनन विवाद में खौफनाक वारदात; कार में पेट्रोल डालकर 4 को जिंदा जलाया, भाजपा नेता समेत 2 की मौत।छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र में मंगलवार की देर रात रेत के अवैध उत्खनन और तस्करी के विवाद को लेकर एक बेहद सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया है। यहाँ एक फॉर्च्यूनर कार को घेरकर उस पर पेट्रोल छिड़क दिया गया और कार सवार 4 लोगों को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया। इस दिल दहला देने वाले हमले में भाजपा के एक पूर्व नेता और उनके भाई की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। यह वारदातपुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, मृतक भाजपा नेता भरत सिंह के एक रिश्तेदार ने नौगई गाँव के रेत घाट का ठेका लिया था। इसी रेत घाट से जुड़े अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर भाजपा नेता मनोज त्रिपाठी के परिवार/गुट के साथ उनका पुराना विवाद चल रहा था।मंगलवार की रात जब भरत सिंह अपने साथियों के साथ फॉर्च्यूनर कार में सवार थे, तभी मनोज त्रिपाठी के गुट से जुड़े लोगों ने डंपर वाहनों की मदद से उनकी कार को चारों तरफ से घेर लिया।आरोपियों ने कार सवार लोगों को संभलने या भागने का मौका दिए बिना गाड़ी पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। कार लॉक होने या घिर जाने के कारण चारों लोग अंदर ही बुरी तरह झुलस गए।घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और झुलसे हुए लोगों को अस्पताल पहुंचाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा रेंज के आईजी (IG) दीपक झा समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया है।पुलिस ने इस खौफनाक हत्याकांड के संबंध में कुछ संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इलाके में तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई मगर सवाल उठता है किआखिर कार छत्तीसगढ़ में अवैध रेत और शराब में खूनी हिंसा की घटना यहाँ तक पहुँच गई है कि जिंदा जलाकर मार दिया जा रहा है.. इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है. घटना आमजनों के लिए खौफनाक और सरकार के लिए शर्मनाक है. बहुत ही दुःखद है. आखिरकार ऐसे अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस एनकाउंटर क्यों नहीं करती या कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करती, 15 से 20 साल के दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस ने द्वारा नहीं लगता कि कोई एनकाउंटर किया हो, क्या छत्तीसगढ़ की पुलिस एनकाउंटर करना भूल गई है या राजनीतिक दबाव इतना है कि पुलिस कुछ कर नहीं पा रही राजनीतिक संरक्षण के कारण गुंडे बदमाशों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

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