छत्तीसगढ़ में श्रृंग ऋषि मंदिर ‘सिहावा’ की पहाड़ियों पर है, जिन्हें ‘महेंद्रगिरि’ के नाम से जाना जाता है. यह स्थान महानदी नदी का उद्गम भी है.।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित सिहावा (नगरी) की पहाड़ियों पर प्रसिद्ध श्रृंगी ऋषि का प्राचीन आश्रम है, जिसे महेंद्रगिरि भी कहा जाता है। यह महानदी का उद्गम स्थल और राम वन गमन पथ का हिस्सा है। मान्यतानुसार,यहाँ श्रृंगी ऋषि जी ने तपस्या की थी और राजा दशरथ ने यहीं पुत्रेष्ठी यज्ञ करवाया था।सिहावा श्रृंगी ऋषि आश्रम छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला, नगरी ब्लॉक (सिहावा), में स्थित है, यहां का पौराणिक महत्व: है की सिहावा क्षेत्र में श्रृंगी ऋषि का आश्रम है, जो प्रभु श्री राम के बहनोई थे (राजा दशरथ की पुत्री शांता के पति)। ऐसा कहा जाता है कि महानदी का उद्गम: इस आश्रम के पास के कुंड से ही हुआ, कुछ लोगों का कहना है कि श्रृंग ऋषि जी कमंडल से जो जल गिरा वह कुंड बन गया और इस कुंड से छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानदी का उद्गम स्थल माना जाता है। सिहावा पर्वत पर एक गुफा में श्रृंगी ऋषि की प्रतिमा है। पास ही में माता शांता का मंदिर भी बना हुआ है। मान्यता: निसंतान दंपत्ति यहाँ पूजा-पाठ और यज्ञ के लिए आते हैं। इस मंदिर की स्थापना सिखवाल ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ और समाज सेवक बंसीलाल जी पुत्र अनिरुद्ध जी उपाध्याय परिवार ने वर्षों पहले करवाया था यह राम वन गमन पथ: में भी इस स्थान को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राम वन गमन पर्यटन सर्किट में शामिल किया गया है। यहां पहुंचने के लिए रायपुर हवाई अड्डे और रेल्वे स्टेशन से लगभग 75-80 किमी (धमतरी के रास्ते) सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।श्रृंगी ऋषि आश्रम | धमतरी जिला |













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