राजधानी रायपुर के कैलाशपूरी इलाज में स्थित चिट्ठी_वाले_हनुमानजी के नाम से प्रसिद्ध है
. सरकारी पोस्ट ऑफिस ने भी अब लाल डब्बा में पत्र डालना का ओर लोगों तक चिट्ठी पत्र भेजने का सिस्टम खत्म कर दिया हो लेकिन रायपुर के कैलाश पूरी के हनुमान जी के पास लोग पत्र छोड़कर जा रहे है,किसी समय.पत्र कभी सूचनाओं और भावनाओं के आदान प्रदान का आसान साधन था. अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त और सुलभ माध्यम था. चिट्ठियां अब इतिहास बन चुकी हैं. डाक सिर्फ सरकारी दस्तावेजों तक सीमित हो चुके हैं.वो भी साधारण पत्र नहीं ऐसे समय में हनुमानजी के नाम से चिट्ठियों का ढेर देखना मेरे लिए हर दिन चकित कर देने वाला अनुभव होता है. पहले सिर्फ आसपास के लोग ही हनुमानजी के लिए पत्र लिखा करते थे, लेकिन अब प्रदेश के दूरदराज से भी प्रभु के नाम से चिट्ठियां पहुंच रही हैं. पोस्ट से आने वाली चिट्ठियों में सिर्फ चिट्ठी वाले हनुमानजी या संक्षिप्त पता लिखा होता है. पहुंचाने वाले भी चिट्ठियों को सम्मान के साथ मंदिर में आकर हनुमानजी को चढ़ाकर चले जाते हैं.दरअसल रायपुर के कैलाशपुरी ढाल के पास स्थित हनुमानजी का मंदिर पिछले कई सालों से चिट्ठी वाले हनुमानजी के मंदिर के नाम से न सिर्फ जाना पहचाना जा रहा है, हर दिन यहां आने वाले पत्रों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. मंदिर में प्रभु की दिन रात सेवा करने वाले पंडितजी टुन्ना महाराज बताते हैं, अब तक दस हजार से अधिक पत्र आ चुके हैं. अधिकांश पत्रों को उन्होंने सहेजकर रखा भी है.पंडितजी की कोशिश होती है पत्रों की गोपनीयता किसी भी कीमत पर भंग न हो. खास बात यह भी है कि पत्र में लिखित मनोकामनाओं के पूर्ण होने के बाद भक्त दर्शन करने भी पहुंचते हैं. इसी के साथ चिट्ठी वाले हनुमानजी के प्रति श्रद्धाभाव और पत्र लिखने से मनोकामनाएं पूर्ण होने का विश्वास भी बढ़ता चला जाता है. प्रभु से यही प्रार्थना है कि भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते रहें. सभी को स्वस्थ, सुखी और संपन्न बनाएं. हम सभी पर उनकी कृपा बनी रहे. अगर आप भी चिट्ठी वाले हनुमानजी के दर्शन के लिए नहीं गए हैं, तो जरूर जाइए…पता- पुलिस लाइन से मारवाड़ी श्मशान घाट वाले रोड में कैलाशपुरी तिराहे के पास.।..













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