इंदौर मध्य प्रदेश संकट मोचन हनुमंत मंदिर खेड़ापति आश्रम के महामंडलेश्वर राजगुरु महाराज 72 घंटे की कठिन भूसमाधि में लीन।

इंदौर के तिल्लौर-शिवनगर मार्ग स्थित ग्राम पीपलिया लोहार में आस्था का एक अलौकिक दृश्य तब देखने को मिला, जब संकट मोचन हनुमंत मंदिर खेड़ापति आश्रम के महामंडलेश्वर राजगुरु महाराज 72 घंटे की कठिन भूसमाधि में चले गए। शुक्रवार दोपहर करीब 12:45 बजे महाराज अपने आराध्य भगवान हनुमान की प्रतिमा को सीने से लगाए सीढ़ियों के सहारे 7 फीट गहरे गड्ढे में उतरे, तो वहां मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से भर आईं। महाराज ने समाधि में जाने से पूर्व संकल्प दोहराया कि वे अपनी तपस्या पूर्ण कर 13 अप्रैल को ठीक उसी समय भक्तों को पुन: दर्शन देंगे।

इस आध्यात्मिक अनुष्ठान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने विशेष रूप से आश्रम पहुंचे। बताया गया कि महाराज की यह कठिन साधना गुरुवार रात 1 बजे से ही मौन और ध्यान के साथ शुरू हो गई थी, जिसे शुक्रवार दोपहर महाआरती के बाद भूसमाधि का रूप दिया गया। अब अगले तीन दिनों तक महाराज बिना अन्न-जल के जमीन के भीतर रहकर लोक कल्याण के लिए साधना करेंगे।

आश्रम में महाराज की समाधि अवधि के दौरान भक्ति का सैलाब उमड़ने वाला है। यहाँ 12 फीट ऊंची विशाल हनुमान प्रतिमा का निरंतर अभिषेक किया जाएगा और परिसर में हनुमान चालीसा का अखंड पाठ गूंजेगा। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन भागवत कथा का भी आयोजन होगा। 13 अप्रैल का दिन क्षेत्र के लिए बेहद खास होगा, जब महाराज अपनी भूसमाधि पूर्ण कर बाहर आएंगे और इस कठिन तपस्या का समापन होगा।

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