17 सितंबर 2026 को इंदौर में पीएम मोदी के जन्मोत्सव पर आयोजन को लेकर अशोक मेहता ने उठाए सवाल,इंदौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर इंदौर सहित देशभर में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर लेखक, पत्रकार एवं पर्यावरणविद् अशोक मेहता ने ऊर्जा, ईंधन और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठाए हैं।मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मोत्सव पर इंदौर में भव्य आयोजन किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में संसाधनों और ईंधन का उपयोग हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि इन आयोजनों में कितना डीजल-पेट्रोल खर्च हुआ, कितनी ऊर्जा इस्तेमाल हुई और कितने मानव-घंटे लगे, इसका आकलन भी होना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि इन संसाधनों और धन का उपयोग सरकारी स्कूलों के विकास, भवनों की व्यवस्था, शिक्षा सुविधाओं और अन्य जनहित के कार्यों में किया जाता तो इंदौर जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती थी।अशोक मेहता ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के संदर्भ में भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब कार्यक्रमों में बड़े-बड़े पोस्टर, होर्डिंग, सभाएं और लोगों को जुटाने के लिए वाहनों का इस्तेमाल होता है, तो यह विचार करना जरूरी है कि इससे वास्तविक रूप से किस प्रकार की सेवा हो रही है।उन्होंने दीपोत्सव के आयोजन को लेकर भी कहा कि देशभर में बड़ी संख्या में दीप जलाए जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों में इस्तेमाल होने वाले तेल और अन्य संसाधनों की खपत को पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।मेहता ने कहा कि दुनिया के कई विकसित देशों में लोकप्रिय नेताओं के जन्मदिन मनाए जाते हैं, लेकिन भारत में जिस तरह बड़े पैमाने पर पोस्टर, होर्डिंग, सभाएं और आयोजनों के लिए संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, उस पर सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भारत के एक आम नागरिक के रूप में अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश की जनता ऐसे आयोजनों को पसंद करती है तो वे भी जनता के साथ हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से यह सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग किस तरह और किस उद्देश्य से किया जा रहा है।— अशोक मेहता, इंदौरलेखक, पत्रकार एवं पर्यावरणविद्
















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