नयापारा चूड़ी लाइन सदर बाजार रायपुर स्थित १५७ वर्ष पूर्व निर्मित श्री बांके बिहारी मंदिर ,जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण हो जाने पर विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव १४ मई २०२६ गुरुवार को होना निश्चित हुआ है. “

राजधानी रायपुर के नयापारा चूड़ी लाइन सदर बाजार रायपुर स्थित १५७ वर्ष पूर्व निर्मित श्री बांके बिहारी मंदिर 🛕 का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण हो जाने के पश्चात विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव १४ मई २०२६ गुरुवार को होना निश्चित हुआ है. “एक सदी से अधिक पुरानी आस्था की अमर गाथा को नया जीवन देने का समय आ गया है…”प्रिय भक्तजनों, सज्जनों एवं श्री बांके बिहारी जी के परम प्रेमियों,लगभग 157 वर्ष पहले, श्रद्धेय श्री बैजू अग्रवाल जी ने रायपुर के हृदय स्थल नयापारा, सदर बाजार में श्री बांके बिहारी मंदिर की नींव रखी थी।यह मंदिर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि अनगिनत भक्तों की आंसुओं-भरी प्रार्थनाओं, नि:स्वार्थ भक्ति और कन्हैया के प्रेम का जीवंत साक्षी है।श्री बांके बिहारी मंदिर में, भगवान श्री शिव एवं माता पार्वती के विग्रह भी होंगे स्थापित.नयापारा सदर बाजार स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर के संबंध में कुछ विशेष रोचक जानकारी रायपुर के नयापारा, सदर बाजार स्थित इस 157 वर्ष पुराने श्री बांके बिहारी मंदिर की आस्था इतनी गहरी है कि यहाँ स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों से लेकर बॉलीवुड के महान कलाकारों तक ने आकर दर्शन किए और प्रणाम किया।विशेष रूप से प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और अभिनेता श्री पृथ्वीराज कपूर (जिन्हें भारतीय सिनेमा का पितामह कहा जाता है) ने जब फिल्म के सिलसिले में रायपुर आए थे, तो वे इस मंदिर में पहुँचे और दंडवत प्रणाम किया था। कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स और मंदिर ट्रस्ट के संदर्भों में यह वर्णित है कि उन्होंने ठाकुर जी के चरणों में सिर नवाया और आशीर्वाद लिया।यह घटना मंदिर की पवित्रता और आकर्षण को और भी बढ़ाती है, क्योंकि पृथ्वीराज कपूर जैसे महान व्यक्तित्व जो सिनेमा और संस्कृति के क्षेत्र में इतने ऊँचे मुकाम पर थे, वे भी यहाँ आकर भक्ति में लीन हो गए। कुछ स्रोतों में उनके पुत्र राज कपूर का भी 1970-72 के आसपास फिल्म प्रमोशन के दौरान मंदिर दर्शन का जिक्र है और पृथ्वीराज जी की तस्वीरें भी मंदिर से जुड़ी यादों में मौजूद बताई जाती हैं।यह कहानी दर्शाती है कि श्री बांके बिहारी जी की कृपा कितनी व्यापक है. अमीर-गरीब, कलाकार-व्यापारी सभी के लिए समान।इस ऐतिहासिक धरोहर श्री बांके बिहारी मंदिर से मेरी और मेरे परिवार की सुनहरी यादें जुड़ी हुई हैं, इसी मुहल्लें में हमारा परिवार का पैतृक निवास है. बचपन से ही स्कूल आते जाते भगवान श्री बांके बिहारी जी का दर्शन करते थे और शरद पूर्णिमा के अवसर पर अमृतमयी खीर का प्रसाद आज भी हमारे स्मृति में है. मंदिर प्रांगण में जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, दुर्गोत्सव और सभी धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था. आप सभी श्रद्धालु भक्तों से निवेदन है कि इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस उत्सव को मनाए और सभी कार्यकम में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें धन्यवाद

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