परीक्षा से बच्चों को कार्यक्रम में भेजने के मामले में जांच समिति गठित,कांग्रेस के अल्टीमेटम के बाद शिक्षा विभाग ने लिया संज्ञान, अंकसूची में त्रुटियों की जांच के भी निर्देश

छत्तीसगढ़। बुधवार को स्कूली बच्चों को परीक्षा के दौरान कथित तौर पर एक राजनीतिक एवं गैर-शैक्षणिक कार्यक्रम में शामिल किए जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। साथ ही अंकसूची में सामने आई त्रुटियों की जांच शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर करीब एक बजे कांग्रेस की ओर से जिला शिक्षा विभाग को इस मामले में अल्टीमेटम दिया गया था। कांग्रेस ने मांग की थी कि परीक्षा दे रहे स्कूली बच्चों को पढ़ाई और परीक्षा से हटाकर राजनीतिक अथवा गैर-शैक्षणिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।मामले को लेकर प्रशासन की ओर से बुधवार को ही सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और प्राचार्यों को निर्देश जारी किए गए। इसमें स्कूली विद्यार्थियों को राजनीतिक एवं गैर-शैक्षणिक आयोजनों में शामिल नहीं करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।इसी बीच बुधवार शाम शिक्षा विभाग ने बच्चों को परीक्षा से हटाकर उपमुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भेजे जाने के मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित कर दी। समिति से पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।अंकसूची में त्रुटियों की जांच भी शुरूइसके अलावा विद्यार्थियों की अंकसूची में सामने आई त्रुटियों को लेकर भी विभाग ने जांच के निर्देश दिए हैं। विभागीय स्तर पर अब इन त्रुटियों के कारणों और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि बच्चों को परीक्षा के समय गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल करना उचित नहीं है। पार्टी ने प्रशासन से शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर सरकार ‘जन सेवा संकल्प’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बच्चों को परीक्षा से हटाकर मंत्रियों के कार्यक्रमों में भेजा जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि उसने इस मामले को प्रमुखता से उठाकर विद्यार्थियों के हित और उनके भविष्य से जुड़े सवालों को सामने रखा है।हालांकि, जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले में जिम्मेदारी और तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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