गुरुवार, 18 जून 2026
विदेश में संघ की पहली शाखा केन्या के मोंबासा में लगीराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की देश से बाहर पहली शाखा पानी के जहाज पर लगी थी, वहीं विदेशी धरती पर पहली शाखा केन्या के मोंबासा में लगी थी। भारत की स्वाधीनता से कुछ ही महीने पहले वर्ष 1946 के अंत में भारतीयों को लेकर अफ्रीका जा रहे एक जहाज पर पंजाब के एक स्वयंसेवक की इच्छा अपने संगठन की प्रार्थना गाने की हुई। उन्होंने संघ की प्रार्थना ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ गाना शुरू किया तो देखा कि कुछ और लोग भी उनके साथ गा रहे हैं। संघ के उस कार्यकर्ता का नाम जगदीश चंद्र शारदा था। यहीं उनकी भेंट संघ के दूसरे स्वयंसेवक मानेक भाई रुगानी से हुई। वे दोनों केन्या जा रहे थे। इसके बाद दोनों ने जहाज पर ही शाखा लगाने का निर्णय किया। उन्होंने उसी जहाज पर शाखा लगाई। जहाज पर लगी उस शाखा को संघ की भारत के बाहर लगी पहली शाखा माना गया। इसके बाद केन्या के शहर मोंबासा पहुँचकर उन्होंने ‘भारत स्वयंसेवक संघ’ का गठन किया और शाखा लगाई। बाद में इसे ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ’ नाम दिया गया। इस तरह विदेश में संघ की पहली शाखा केन्या के मोंबासा में लगी। विदेशी धरती पर संघ की इसी पहली शाखा के सदस्यों ने तंजानिया, युगांडा, मॉरीशस और अफ्रीका के अन्य हिस्सों में संगठन का प्रचार-प्रसार किया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विदेशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ के नाम से कार्य करता है, जो 40 देशों में पंजीकृत है। अरब के कुछ देशों में संघ की शाखा बंद कमरे के भीतर लगाई जाती है। फिनलैंड एवं कुछ अन्य देशों में ऑनलाइन शाखा लगाई जाती है।
















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