@विभांड ऋषि का मंदिर@ महाराष्ट्र राज्य के यवतमाल जिले में पुश नदी के किनारे गने जंगल में हेमाडपंथी वास्तु शिल्प से निर्मित विभांडकेश्वर मंदिर स्थित है l

महाराष्ट्र राज्य के यवतमाल जिले में पुश नदी के किनारे गने जंगल में हेमाडपंथी वास्तु शिल्प से निर्मित विभांडकेश्वर मंदिर स्थित है lमंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य सुरेश एवं सागर पाटिल ने अवगत कराया कि उनके पूर्वज गोविंदराम नारायण राव पाटिल द्वारा स्वविवेक से लगभग 100 वर्ष पूर्व इस स्थान की स्वप्न में जानकारी प्राप्त होने से ढूंढ कर पूजा अर्चना शुरू की गई lवर्तमान में यहां पर 7 कमरों से निर्मित विश्रामगृह तथा 5 कमरों का संत निवास निर्मित है l इसके अलावा सरकार द्वारा 50 लाख रुपए स्वीकृत करके हाल ही में 30 × 70 फीट का सभा भवन निर्मित कर दिया है lपंचायत प्रशासन तथा पटवारी से वार्तालाप के दौरान अवगत कराया की 25 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति और आश्रम सौंदर्य करण हेतु जारी हो चुकी है तथा फंड पंचायत के खाते में आ चुका है l जिनके खर्च हेतु मेरे द्वारा भी प्रबंध कार्यकारिणी सदस्यों को सुझाव दिए गए जिनको उन्होंने नोट कर लिया है तथा कार्य पूर्ण होने पर अन्य श्रृंग बंधु के साथ दोबारा उपस्थिति हेतु आमंत्रित कर दिया है जिसकी स्वीकृति मैंने तुरंत उनको दे दी है मंदिर के पास ही थोड़ी दूरी पर विशाल पुश धरण बांध का निर्माण किया गया इस आश्रम से गहरा लगाव रखने वाले तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री रहे आदरणीय बसंत राव नायक द्वारा आश्रम को डूब से बचने के लिए बांध की ऊंचाई कम करने का निर्णय लिया गया जिसके कारण यह आश्रम बच गया lआश्रम में दुर्लभ कदम के वृक्ष भी खड़े हुए हैं पास में पुस नदी में पानी भरा हुआ है lप्राचीन मंदिर पत्थरों को तरास कर निर्मित किया गया था जिसमें गर्भगृह तथा आगे बरामदा निर्मित था पिछले वर्ष बरामदा गिरा दिया गया उसके स्थान पर आरसीसी से दोबारा बनाया गया परंतु तत् समय गर्भ गृह में विशाल नाग देवता दिखाई दिए जाने के कारण उसको यथावत रखा गया lमेरे द्वारा भी उनको गर्भ गृह को मूल रूप में रखे जाने हेतु तथा अनावश्यक रंग रोगन को दोबारा हटाकर यथावत रूप देने हेतु सुझाव दिया गया जिसको प्रबंधन समिति ने मान लिया और अगले दो-तीन महीने में सुधार हेतु आस्वस्त किया गया lउपस्थित समिति सदस्य तथा भक्तों ने मुझे विभांडक ऋषि के प्रतिनिधि के रूप में जो समान दिया गया जिसका वर्णन हेतु मेरे पास कोई शब्द नहीं है l सिर्फ इतना कहूंगा कि ऋषि राज का प्रभाव इस आदिवासी और बंजारा क्षेत्र में आज भी हजारों वर्ष पश्चात भी यथावत है lआप सभी बंधु गोर्बान्वित होंगे कि अपने वंश प्रवर्तक के मानने वाले भक्त आज भी हमको जो सम्मान दे रहे हैं lअभिभूत करने वाला है !

शिवराज शर्मा ऋषि श्रृंग एक खोज अभियान के तहत l

मंदिर की मुख्य विशेषताएंपौराणिक संबंध: यह मंदिर महर्षि विभांडक (ऋषि ऋष्यशृंग के पिता) की तपोभूमि माना जाता है।स्थापत्य कला: इस मंदिर का निर्माण हेमाडपंथी स्थापत्य शैली (Hemadpanthi Style) में किया गया है। इस शैली में पत्थरों को जोड़ने के लिए चूने या गारे का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि पत्थरों को एक-दूसरे में खांचे (Interlocking) बनाकर फंसाया जाता है।प्राकृतिक स्थान: घने जंगल और नदी के किनारे स्थित होने के कारण यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है।

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