श्रृंगी ऋषि समाधि स्थल महाराष्ट्र राज्य के यवतमाल जिले के उपखंड मुख्यालय पुसद से 5 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है l

महाराष्ट्र राज्य के यवतमाल जिले के उपखंड मुख्यालय पुसद से 5 किलोमीटर दूर श्रृंगी ऋषि समाधि स्थल – अत्यंत रमणीक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है lश्रृंगी ऋषि बाबा (अन्सिंग) के बुलंद दरवाजे के (गोखड़े) प्रवेश द्वार की चौखट पर जब मैं अपने पिताजी की जागीर समझकर बैठा तो ऐसी अनुभूति हुई की मैं किसी बहुत बड़े सन्यासी” राजा का राजकुमार हूं” l. आश्रम में स्थित भव्य राधा कृष्ण मंदिर के दर्शन किए और जब मैं श्रृंगी ऋषि समाधि मंदिर पर पहुंचा तो जाली वाली फाटक लगी हुई थी और उसके ताला लगा हुआ था जब मेरे द्वारा पुजारी से ताला खोलने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया कि 5:00 बजे पहले ताला नहीं खुलेगा l

तत्काल मैंने . उनसे अनुरोध किया कि मैं मेरे बाबा की समाधि के दर्शन करने 1200 किलोमीटर दूर से चलकर यहां आया हूं और मैं इनका वंशज हूं l
यह कहते ही उन्होंने ताला खोल दिया l और खुशी जाहिर की l

जब मैं गर्भ गृह में पहुंचा तो दर्शन करके खुशी का ठिकाना नहीं रहा पुजारी जी ने आश्रम की पौराणिक जानकारी देते हुए बताया कि-
यहां दो बार भगवान कृष्ण श्रृंगी ऋषि से मिलने पधारे थे !
सिद्ध संत कार्ला जी द्वारा यहां रहकर इस आश्रम का विकास करवाया ऐसी मान्यता है कि वे श्रृंगी ऋषि से साक्षात वार्तालाप किया करते थे l
वे बताते थे कि शिवलिंग के ठीक नीचे ऋषि राज की जीवंत समाधि है रात्रि में कभी-कभी गौमुख से ओंकार का उच्चारण सुनाई देता है तथा कभी-कभी गर्भ गृह में वीणा वादन सुनाई देती है l
मंदिर परिसर की धोणी मैं चिमटे की 2- कड़ियां यदि कोई मनोरथी श्रृंगी ऋषि का नाम लेकर एक साथ खड़ी करके चिपका देता है तो यह उसके मनोरथ पूर्ण होने का संकेत प्रमाणित होता है ऐसी मान्यता है l

मंदिर में माघ मास में महा रूद्र अनुष्ठान . तथा शिवरात्रि पर यात्रा उत्सव आयोजित होता है जिसमें हजारों भक्त भाग लेते हैं l

पुजारी संगम कबाड़े ने अवगत कराया की

इस आश्रम से भारत सरकार के पूर्व गृहमंत्री शिवराज पाटिल की आस्था भी गहरी थी वे यहां पर आया करते थे l

शिवराज शर्मा
ऋषि श्रृंग एक खोज अभियान

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