4 जुलाई 2026 (झारखंड)
लोहरदगा जिले के हाटी ग्राम सभा में एक सूचना पट्टी लगाए जाने का मामला चर्चा में है। इस सूचना पट्टी में कथित रूप से पादरी, पास्टर तथा अन्य व्यक्तियों के धर्मांतरण के उद्देश्य से गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का उल्लेख किया गया है। इसे ग्राम सभा द्वारा गांव की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया कदम बताया जा रहा है।जानकारी के अनुसार, सूचना पट्टी में “चंगाई सभा” जैसी गतिविधियों पर भी स्थायी रोक का उल्लेख किया गया है। इस पहल को ग्राम सभा के स्वाभिमान और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।इस पहल के समर्थकों का दावा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 तथा पेसा (PESA) कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपने पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कुछ मामलों में ग्राम सभा के अधिकारों से संबंधित निर्णय दिए हैं।बताया जा रहा है कि इस अभियान में गांव के सनातनी परिवारों ने सरना समाज का सहयोग किया है, जिसे “सरना–सनातन एकता” का उदाहरण बताया जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि आने वाले समय में झारखंड के अन्य गांवों में भी ऐसी सूचना पट्टियां लगाने की तैयारी की जा रही है।हालांकि, सूचना पट्टी में किए गए सभी दावों तथा न्यायालयों के संदर्भों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि इस मामले में प्रशासन या संबंधित पक्ष का कोई आधिकारिक बयान सामने आता है, तो उससे स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


















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