श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल में मिलेट्स पर राष्ट्रीय वर्कशॉप, डॉ. खादर वल्ली बोले— मोटे अनाज आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करेंगे।

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नवा रायपुर, 4 अगस्त। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, अटल नगर (नवा रायपुर) में ‘सेहत और टिकाऊ धरती के लिए मिलेट्स (मोटे अनाज)’ विषय पर एक दिवसीय वर्कशॉप एवं इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फूड साइंटिस्ट एवं “मिलेट मैन ऑफ इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. खादर वल्ली ने कहा कि “मोटे अनाज आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करेंगे।”
कार्यक्रम का आयोजन श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल एवं श्री सत्य साई संजीवनी इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड एलाइड हेल्थकेयर साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, किसानों, छात्रों और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्र मुख्य अतिथि रहे, जबकि डॉ. आर. श्रीधर सम्मानित अतिथि और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की डीन डॉ. आरती गुहे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
डॉ. पी. के. पात्र ने कहा कि भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में इलाज से अधिक बीमारी की रोकथाम पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और मोटे अनाज आधारित आहार को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।
डॉ. आरती गुहे ने कहा कि कोदो, कुटकी, रागी, सांवा और कांगनी जैसे मिलेट्स कम पानी में तैयार होने वाली जलवायु-अनुकूल फसलें हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूत करती हैं।
तकनीकी सत्र में डॉ. खादर वल्ली ने बताया कि प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड अनाज के बढ़ते उपयोग से डायबिटीज, मोटापा, उच्च रक्तचाप और किडनी जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों से कोदो, कुटकी, कांगनी, सांवा, ब्राउनटॉप और रागी जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों को दैनिक भोजन का हिस्सा बनाने की अपील की।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने डायबिटीज प्रबंधन, किडनी रोग, बच्चों के पोषण, महिलाओं के स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती और मिलेट्स से बनने वाले व्यंजनों को लेकर डॉ. वल्ली से संवाद भी किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मिलेट फूड प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कहा कि राज्य सरकार मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पारंपरिक रूप से कोदो, रागी, सांवा और कांगनी जैसे पौष्टिक मिलेट्स की भूमि रहा है और अब इन्हें आधुनिक पोषण विज्ञान भी स्वास्थ्यवर्धक मान रहा है।
वर्कशॉप का मुख्य आकर्षण मिलेट फूड प्रदर्शनी रही, जिसमें नर्सिंग छात्रों ने बाजरा और अन्य मोटे अनाजों से तैयार पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन प्रस्तुत किए। प्रदर्शनी की अतिथियों ने सराहना करते हुए छात्रों के प्रयासों की प्रशंसा की।
समारोह में डॉ. खादर वल्ली सहित सभी अतिथियों का शॉल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मान किया गया। साथ ही विभिन्न राज्यों के मरीजों को “गिफ्ट ऑफ लाइफ” प्रमाणपत्र वितरित किए गए तथा सहभागी संस्थानों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में नर्सिंग एवं मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी, स्वास्थ्यकर्मी, विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि, किसान, अभिभावक और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन धनंजय गोस्वामी एवं किरण वर्मा ने किया तथा समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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