छत्तीसगढ़ के अभनपुर स्थित हुकुमचंद शर्मा आरा मिल पर वन विभाग ने बड़ी छापेमारी की कार्रवाई करते हुए कोरबा से तस्करी कर लाई गई 100 साल से भी अधिक पुरानी बेशकीमती साल और खैर की लकड़ियां जब्त की हैं। इस करोड़ों रुपये के लकड़ी तस्करी घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब वन विभाग के उच्च अधिकारियों को इसकी गुप्त सूचना मिली।तस्करों ने इन ऐतिहासिक और कीमती पेड़ों को सरकारी डिपो में भेजने के बजाय सीधे निजी आरा मिल में खपाने के लिए उठा लिया था।मामले से जुड़े मुख्य पहलू:पेड़ों की कटाई का स्थान: यह लकड़ियां कोरबा के CSEB और SECL की जमीन से अवैध रूप से काटी गई थीं, जहां ये सौ-दो सौ साल पुराने संरक्षित पेड़ पर्यावरण का हिस्सा थे।बड़ी जब्ती: अभनपुर की आरा मिल में दी गई दबिश के बाद वन विभाग ने करोड़ों रुपये मूल्य की कीमती साल और खैर की लकड़ियां अपने कब्जे में ले ली हैं।सिंडिकेट का खुलासा: इस पूरी अवैध तस्करी को एक बड़े सिंडिकेट द्वारा अंजाम दिया जा रहा था। मामले की जांच के दौरान सिंडिकेट का मुख्य सरगना मनीष अग्रवाल फिलहाल फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है।उच्च स्तर पर कार्रवाई: स्थानीय स्तर पर सांठगांठ के चलते मामला दबा हुआ था, लेकिन विभाग के उच्च अधिकारियों तक जानकारी पहुंचने के बाद विशेष टीम गठित कर यह छापेमारी की गई।
छत्तीसगढ़ के अभनपुर स्थित हुकुमचंद शर्मा आरा मिल पर वन विभाग ने बड़ी छापेमारी की कार्रवाई करते हुए कोरबा से तस्करी कर लाई गई 100 साल से भी अधिक पुरानी बेशकीमती साल और खैर की लकड़ियां जब्त की हैं.













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