रायपुर, 21 अगस्त 2026। त्योहारों का सीजन शुरू होने से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में शक्कर की कीमतों में तेज उछाल ने आम उपभोक्ताओं और मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। रायपुर समेत प्रदेश के कई बाजारों में शक्कर के थोक भाव में पिछले करीब डेढ़ महीने में बड़ा इजाफा हुआ है। स्थानीय बाजार की रिपोर्टों के अनुसार, करीब डेढ़ माह पहले जहां थोक शक्कर लगभग ₹42-43 प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब ₹69-71 प्रति किलो तक पहुंच गई है।इस तेजी का सीधा असर आगामी गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। देशभर में भी शक्कर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है और केंद्र सरकार ने बढ़ती कीमतों तथा त्योहारों के दौरान संभावित मांग को देखते हुए आपूर्ति बढ़ाने के कदम उठाए हैं।छत्तीसगढ़ में तेजी ने बढ़ाई चिंता, छत्तीसगढ़ में शक्कर के दामों में अचानक आई तेजी से किराना कारोबारियों से लेकर मिठाई दुकानदारों तक की लागत बढ़ गई है। शक्कर मिठाई, बेकरी उत्पाद, पेय पदार्थ और कई अन्य खाद्य सामग्री में प्रमुख कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होती है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने पर तैयार उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है।देश के आधिकारिक मूल्य निगरानी आंकड़ों के अनुसार 20 अगस्त तक अखिल भारतीय औसत खुदरा शक्कर कीमत ₹55.70 प्रति किलो थी, जो 20 जुलाई को ₹48.18 प्रति किलो थी। यानी एक महीने में राष्ट्रीय औसत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।क्यों बढ़ रहे हैं शक्कर के दाम?सरकार और बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार हालिया तेजी के पीछे कई कारण हैं। घरेलू शक्कर उत्पादन उम्मीद से कम रहना, गन्ने की फसल पर मौसम का असर, त्योहारों के कारण बढ़ती मांग और बाजार में जमाखोरी जैसी स्थितियां कीमतों पर दबाव डाल रही हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा तेजी के लिए केवल एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।त्योहारी सीजन अगस्त से नवंबर के बीच शक्कर की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। गणेशोत्सव, नवरात्र, दशहरा और दीपावली के दौरान मिठाई एवं खाद्य कारोबार में खपत बढ़ने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।केंद्र सरकार ने उठाए बड़े कदमबढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची शक्कर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह अनुमति 31 अक्टूबर 2026 तक है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण करना है।इसके अलावा थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी घटाई गई है। एक सितंबर से 30 नवंबर तक हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक शक्कर इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ताओं को केवल 15 दिनों की जरूरत के बराबर स्टॉक रखने की अनुमति होगी। यह कदम जमाखोरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असरशक्कर के दामों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल चाय की मिठास तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, बेकरी और शक्कर आधारित खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ने से त्योहारों के दौरान इनके दाम बढ़ सकते हैं। ऐसे में पहले से महंगाई का सामना कर रहे उपभोक्ताओं के लिए इस बार त्योहारों की मिठास कुछ महंगी पड़ने की आशंका है।हालांकि सरकार द्वारा शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक सीमा जैसे कदम उठाए जाने के बाद बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ में शक्कर के दामों ने बढ़ाई मिठास की कीमत, त्योहारों से पहले ₹70 किलो तक पहुंचा भावगणेशोत्सव, नवरात्र और दिवाली से पहले बढ़ी चिंता; मिठाई और खाद्य कारोबार पर पड़ सकता है सीधा असर।











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