छत्तीसगढ़ के चिरमिरी में जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के विवादित बयान से धार्मिक और राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। चरणदास महंत द्वारा रामभद्राचार्य को ‘जगद्गुरु’ न मानने और उन्हें ‘भाजपा का प्रचारक’ बताने के बाद, कथा आयोजन समिति और सनातन प्रेमियों ने महंत को रावण की मानसिकता वाला बताते हुए उनका पुतला फूंका है और इस बयान का तीव्र विरोध किया है।इस पूरे मामले से जुड़े मुख्य बिंदु और विवाद इस प्रकार हैं:1. चरणदास महंत का विवादित बयान उपाधि पर सवाल: मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी दौरे के दौरान कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे स्वामी रामभद्राचार्य को “जगद्गुरु” की उपाधि के योग्य नहीं मानते।बीजेपी प्रचारक का आरोप: महंत ने आरोप लगाया कि रामभद्राचार्य अपने प्रवचनों के माध्यम से भाजपा का प्रचार कर रहे हैं और लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।कथा का बहिष्कार: उन्होंने घोषणा की कि वे चिरमिरी के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में चल रही श्रीराम कथा में शामिल नहीं होंगे और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी वहां न जाने की सलाह दी।पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना: महंत ने अपने बयान में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर भी निशाना साधा।2. जगद्गुरु रामभद्राचार्य का तीखा पलटवारचिरमिरी में व्यासपीठ से कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस बयान पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया:ज्ञान के परीक्षण की खुली चुनौती: उन्होंने महंत को चुनौती देते हुए कहा, “मैं ऐसे ही जगद्गुरु नहीं बना हूँ। यदि साहस है, तो आकर मेरे ज्ञान और विद्वत्ता का पूर्ण परीक्षण कर लें। मैं 22 भाषाओं में धाराप्रवाह बोल सकता हूँ और हर कसौटी पर खरा हूँ”।जगद्गुरु के मापदंड: उन्होंने स्पष्ट किया कि जगद्गुरु बनने के लिए शास्त्रों के कड़े नियम होते हैं और उन्होंने प्रस्थानत्रयी (तीन मुख्य ग्रंथों) पर भाष्य लिखा है, जिसे पूरे संत समाज और अखाड़ों ने मान्यता दी है।कांग्रेस पर सीधा हमला: रामभद्राचार्य ने रामजन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्हें रामभक्तों से दिक्कत है, उन्हें मिर्ची लग रही है। उन्होंने सवाल दागा कि निहत्थे रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले और देश का विभाजन करने वाले आज किस मुंह से सवाल कर रहे हैं!3. जनता और आयोजन समिति का भारी आक्रोशपुतला दहन: महंत की इस टिप्पणी से नाराज कथा आयोजन समिति, स्थानीय नागरिकों और सनातन धर्म समर्थकों ने चरणदास महंत के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनका पुतला फूंका।महंत को बताया ‘रावण’: विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने महंत के बयान की तुलना रावण की अहंकारी और संतों का अपमान करने वाली मानसिकता से की। उन्होंने कहा कि संतों और सनातन धर्म का ऐसा अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।यह विवाद अब छत्तीसगढ़ में पूरी तरह से भाजपा बनाम कांग्रेस और सनातन बनाम राजनीति की वैचारिक जंग का रूप ले चुका है, जिससे राज्य का सियासी पारा बेहद चढ़ गया है।


















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