एम्स रायपुर ने रचा इतिहास: 100 सफल किडनी प्रत्यारोपण कर स्थापित किया नया कीर्तिमान।

एम्स रायपुर ने रचा इतिहास: 100 सफल किडनी प्रत्यारोपण कर स्थापित किया नया कीर्तिमानअखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 100 सफल किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) पूरे कर लिए हैं। संस्थान का 100वां सफल किडनी प्रत्यारोपण 30 जून 2026 को कांकेर जिले के 54 वर्षीय मरीज पर किया गया। मरीज पिछले चार वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर था। उसे उसकी पत्नी ने अपनी किडनी दान की। वर्तमान में दाता और मरीज दोनों ट्रांसप्लांट आईसीयू में स्वस्थ होकर तेजी से रिकवरी कर रहे हैं।एम्स रायपुर का किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम आज मध्य भारत में नई पहचान बना चुका है। नए स्थापित सभी एम्स संस्थानों में मृत अंगदाता (Deceased Donor) अंगदान कार्यक्रम शुरू करने वाला यह पहला एम्स है। संस्थान की विशेषज्ञ टीम ने किडनी पेयर्ड डोनेशन (स्वैप ट्रांसप्लांट), रक्त समूह असंगत (ABO-Incompatible) किडनी प्रत्यारोपण तथा बच्चों में किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल एवं अत्याधुनिक प्रक्रियाओं में भी सफलता प्राप्त की है।छत्तीसगढ़ का एकमात्र सरकारी संस्थान होने के नाते, जहां किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध है, एम्स रायपुर ने जरूरतमंद मरीजों को समान और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी है। अब तक किए गए 100 किडनी प्रत्यारोपणों में से 98 आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह निःशुल्क किए गए हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। संस्थान ने 91 प्रतिशत ग्राफ्ट सर्वाइवल तथा 92 प्रतिशत मरीजों की सर्वाइवल दर हासिल कर उत्कृष्ट परिणाम भी दर्ज किए हैं।इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर एम्स रायपुर में एक सम्मान समारोह आयोजित कर प्रत्यारोपण टीम, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स, आईसीयू नर्सिंग स्टाफ तथा आयुष्मान मित्रों को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने पूरी ट्रांसप्लांट टीम को बधाई दी तथा जीवित अंगदाताओं और उन 14 दिवंगत अंगदाताओं के परिवारों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अंगदान का महान निर्णय लेकर कई लोगों को नया जीवन दिया।उन्होंने कहा, “100 सफल किडनी प्रत्यारोपण केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एम्स रायपुर की उच्चस्तरीय चिकित्सा क्षमता, विशेषज्ञता और टीमवर्क का प्रमाण है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से हम आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों तक भी अत्याधुनिक उपचार निःशुल्क पहुंचा रहे हैं। फिर भी हमारा लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है। वर्तमान में लगभग 150 क्रॉनिक किडनी रोगी मृत अंगदाता से किडनी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि वे अंगदान का संकल्प लें। आपका एक निर्णय कई लोगों को नया जीवन दे सकता है।”

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