कटनी को मिलने जा रही ऐतिहासिक सौगात: देश की सबसे लंबी जल सुरंग अंतिम चरण में, अक्टूबर से खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी
कटनी। कटनी जिले के लिए सिंचाई और कृषि विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आने वाली है। स्लीमानाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग (टनल) का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 15 वर्षों से निर्माणाधीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अब केवल दो मीटर की खुदाई शेष है। इसके पूरा होते ही सुरंग का ‘ब्रेकथ्रू’ होगा और बिना किसी लिफ्ट या पंप के बरगी बांध का पानी सीधे कटनी और विंध्य क्षेत्र के खेतों तक पहुंचेगा।नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) द्वारा वर्ष 2011 में शुरू की गई इस परियोजना में जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे जर्मनी की अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) से सुरंग बनाई गई है। निर्माण के दौरान ऊंचे भूजल स्तर, जमीन धंसने (सिंकहोल) और 56 बेहद कठोर चट्टानों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन कठिन परिस्थितियों के कारण परियोजना की लागत 799 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1,442 करोड़ रुपये हो गई।करीब 11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग के साथ 12 किलोमीटर लंबी ओपन नहर और एक किलोमीटर लंबी कट-एंड-कवर संरचना भी तैयार की गई है। यह परियोजना विंध्य पर्वतमाला की रिज लाइन को पार करते हुए नर्मदा का पानी कटनी सहित कई जिलों तक पहुंचाएगी।इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ कटनी जिले के किसानों को मिलेगा। जिले की 21,823 हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की मानसून पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा कटनी, मैहर, सतना, जबलपुर, पन्ना और रीवा सहित 1,450 गांवों की करीब 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि भी इस योजना से लाभान्वित होगी।NVDA के एसडीओ दीपक मंडलोई के अनुसार, सुरंग का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष दो मीटर की खुदाई मशीनों को अलग करने के बाद अगले छह सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी। विभाग का लक्ष्य अक्टूबर 2026 से टनल के माध्यम से जलापूर्ति और सिंचाई व्यवस्था शुरू करने का है।यह परियोजना न केवल कटनी जिले के सिंचाई इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगी, बल्कि विंध्य क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। किसानों के लिए यह योजना लंबे समय से प्रतीक्षित सौगात साबित होने जा रही है।













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