रायपुर, 16 जुलाई। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अति-दुर्गम और पूर्व नक्सल प्रभावित जाटलूर क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से 250 फीट लंबा लकड़ी का फुट सस्पेंशन ब्रिज बनाकर विकास और विश्वास की नई मिसाल पेश की है। इस पुल के निर्माण से बरसात के दौरान उफनते जाटलूर नाला को पार करने की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो गया है और कई गांवों का संपर्क अब सालभर बना रहेगा।आईटीबीपी की 38वीं वाहिनी द्वारा तैयार किए गए इस पुल का लोकार्पण केंद्रीय सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक अजय पाल सिंह ने किया। लगभग 250 फीट लंबे, 5 फीट चौड़े और 15 फीट ऊंचे इस पुल का निर्माण सुरक्षा बलों के जवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने श्रमदान तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग से किया है।यह पुल पिछले वर्ष नवंबर में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए वीर जवान अमोल माधव राव महस्के की स्मृति को समर्पित किया जाएगा। लोकार्पण समारोह में आईटीबीपी की विभिन्न वाहिनियों के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, शिक्षक और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे मौजूद रहे।इस अवसर पर आईटीबीपी ने सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत ग्रामीणों और विद्यार्थियों को साइकिलें वितरित कीं तथा स्वरोजगार, कौशल विकास और केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के दौरान पुल निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जवानों और अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। महानिरीक्षक अजय पाल सिंह ने कहा कि शहीद अमोल माधव राव महस्के के नाम पर पुल का नामकरण उनके अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को सच्ची श्रद्धांजलि है।ग्रामीणों ने आईटीबीपी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पुल केवल दो किनारों को ही नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों और आम जनता के बीच विश्वास और सहयोग के रिश्ते को भी मजबूत करेगा। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, सुरक्षा और जनभागीदारी के नए दौर का प्रतीक बनकर उभरी है।















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