धमतरी 17 /जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम नारी की ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और पारंपरिक हस्तकला संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। शासन के सहयोग और महिलाओं की मेहनत से यह समिति न केवल ग्रामीणों के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बनी है, बल्कि अपनी संबलपुरी साड़ियों के जरिए ओडिशा के बाजारों में भी अलग पहचान बना रही है।ग्रामोद्योग विभाग (हाथकरघा प्रभाग) की योजनाओं के तहत समिति को नियमित रूप से धागा, आधुनिक करघे, बुनाई प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है और बाजार की मांग के अनुरूप बेहतर गुणवत्ता वाले वस्त्र तैयार किए जा रहे हैं।संबलपुरी साड़ियों से मिली नई पहचानपहले ग्राम नारी में बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाओं ने इस कला को अपनाया। अपनी विशिष्ट इकत डिज़ाइन, आकर्षक रंगों और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण इन साड़ियों की अच्छी मांग है। महिलाओं ने इस पारंपरिक कला को सीखकर इसे आय का स्थायी स्रोत बना लिया है।हर महीने 3 से 4 लाख का कारोबारवर्तमान में समिति प्रतिमाह 300 से 400 संबलपुरी साड़ियों का उत्पादन कर रही है। इनकी बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के विभिन्न बाजारों में होती है। इससे समिति का मासिक कारोबार बढ़कर 3 से 4 लाख रुपये तक पहुंच गया है।महिलाओं की आय में दोगुना इजाफाइस पहल का सबसे बड़ा लाभ गांव की महिलाओं को मिला है। पहले जहां वे प्रतिदिन 300 से 350 रुपये कमाती थीं, वहीं अब उनकी दैनिक आय बढ़कर 550 से 600 रुपये हो गई है। कौशल उन्नयन के माध्यम से भविष्य में महिलाओं की आय 1,000 से 1,200 रुपये प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ नेतृत्व और सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता भी मिली है।हाथकरघा उद्योग को मिल रही नई पहचानग्राम नारी की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और स्थानीय मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं। यदि समिति को ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिले, तो यह पहल छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उद्योग को देशभर में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

















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