श्रृंग ऋषि द्वारा पुत्रकामेश्ती यज्ञ को बहुत सुंदर उकेरा हुआ है चित्र, सुदूर दक्षिण के राज्य तमिल नाडु के जिला तंजावुर के कुंभकोणम शहर का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर नागेश्वर स्वामी टेंपल में,

तमिल नाडु में श्रृंगी ऋषि के चित्र मंदिर की दीवारों पर

–सुदूर दक्षिण के राज्य तमिल नाडु के जिला तंजावुर के कुंभकोणम शहर का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर नागेश्वर स्वामी टेंपल है कुंबकोणम जिला मुख्यालय तंजावुर से 40 किलोमीटर तथा चेन्नई से 273 किलोमीटर दूर है इस मंदिर का निर्माण आदित्य चोल द्वारा नवी शताब्दी मैं करवाया था मंदिर की स्थापत्य कला लाजवाब है मंदिर परिसर में पैनल्स अर्थात पत्थर की सील पट्टी का का बहुतायत से प्रयोग हुआ है इसकी शुरुआत एक देवी मूर्ति से होती है देवी के चरण कमलों में लगे हुए 3 पैनल्स में प्रथम पैनल महाराज दशरथ के लिए श्रृंगी ऋषि द्वारा करवाए जा रहे पुत्रकामेश्ती यज्ञ को बहुत सुंदर उकेरा हुआ है panel ko अर्थात पट्टी का को बड़ा करके देखने पर स्पष्ट है महाराज दशरथ तीनों रानियां गुरु वशिष्ठ तथा प्रधानाचार्य श्रृंगी ऋषि स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं यज्ञ देवता पायस का कटोरा लेकर उपस्थित होते हैं तथा इसके आनुपातिक रूप से विभाजन पर प्रभु श्री राम सहित चारों भाइयों का इस धरा पर पधार ना संभव हुआ इस बाबत इसकी पुष्टि Kumbakonam Arts College के प्रोफेसर श्री शिव रामकृष्णन से की गई मंदिर में स्वयंभू भगवान शिव की मूर्ति जोकि सूर्य देव तथा नागराज द्वारा पूजित होने का उल्लेख है यह बहुत हर्ष का विषय है कि देश के दक्षिण किनारे पर विख्यात धार्मिक नगरी कुंभकोणम में श्रृंगी ऋषि महाराज की मूर्ति लगी हुई है गणित के विश्व विख्यात विद्वान श्रीनिवास रामानुजन कुंभकोणम के ही रहने वाले हैं दक्षिण की यात्रा के दौरान हमें इस शहर तथा नागेश्वर स्वामी टेंपल तथा श्रृंगी ऋषि की मूर्ति पट्टी का का दर्शन करना चाहिए ।

शिवराज शर्मा मोटरास द्वारा प्राप्त जानकारी

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