सूरजपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल के प्रधानपाठक कथित रूप से शराब के नशे में स्कूल पहुंचे और परिसर में ही जमीन पर लोटते नजर आए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन शिक्षकों के हाथों में बच्चों का भविष्य है, यदि वही नशे में स्कूल पहुंचेंगे तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी? ऐसे मामलों से न केवल स्कूल की गरिमा धूमिल होती है, बल्कि मासूम विद्यार्थियों के मन पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।यह पहला मामला नहीं है। लगभग हर वर्ष प्रदेश के किसी न किसी हिस्से से शराब के नशे में शिक्षकों के स्कूल पहुंचने की खबरें सामने आती हैं। इसके बावजूद ऐसे मामलों पर सख्त और स्थायी कार्रवाई होती दिखाई नहीं देती।लोगों का कहना है कि शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को केवल कार्रवाई की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने चाहिए। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालयों में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर गंभीरता से काम करना चाहिए।यह घटना एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। क्या केवल सरकारें बदलने से व्यवस्था सुधरेगी, या शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में भी जवाबदेही और अनुशासन लाने की जरूरत है? कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा की सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन यदि स्कूलों में ऐसी लापरवाही जारी रही तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?फिलहाल स्थानीय लोगों ने दोषी प्रधानपाठक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग पर हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है।
स्कूल है या शराब का अड्डा? नशे में धुत प्रधानपाठक का वीडियो वायरल, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल,सूरजपुर (छत्तीसगढ़)।













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